

जिला बरेली के अंतर्गत तहसील फरीदपुर पर स्थित सरकारी अस्पताल के डॉक्टर अपनी मर्जी के मुताबिक बाहर के मेडिकल के लिए दवाई लिख रहे हैं जबकि मैरिज सरकारी अस्पताल पर सरकार द्वारा जारी दवाई लेने के लिए जाते हैं परंतु डॉक्टर द्वारा मरीज को एक पर्ची थाम कर उनको कुछ दवाई बाहर स्थित मेडिकल की लिख देते हैं आखिर क्या मेडिकल और चिकित्सा के बीच किसी तरह का कोई संबंध है
आपको बता दे डॉक्टर के द्वारा लिखी गई दवाई सिर्फ मेडिकल के बाहर स्थित मेडिकलों पर ही मिलती है जिसकी कीमत बाजार से कई गुना होती है
कई डॉक्टर के टेबल पर मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव के पंपलेट और दवाइयां के सैंपल भी मिल जाएंगे
आखिर क्यों गरीब जनता को सरकारी दवाई का लालच देकर ठगी का शिकार बनाया जा रहा
सस्ती सरकारी दवाई के चक्कर में गरीब मजदूर का पैसा खा रहे
जबकि सरकार ने जन औषधि केंद्र के जरिए गरीबों को सस्ती से सस्ती दवाई उपलब्ध करने के लिए वचनबद्ध है वहीं सरकारी चिकित्सक सरकार की मंशा पर पानी फेरते नजर आ रहे हैं
माननीय योगी आदित्यनाथ व प्रधानमंत्री मोदी जी से अनुरोध है कि सरकारी अस्पताल के बाहर यदि जन औषधि केंद्र खोले जाए तभी जनता को सस्ती दवाई उपलब्ध हो पाएगी वरना ऐसे ही जानता लुटती रहेगी
