
*(फर्रुखाबाद लोकसभा)*
*फर्रुखाबाद चुनाव में यादवों की हालत सांप छछूंदर जैसी।*
*2014 में सपा के रामेश्वर सिंह यादव चुनाव हारे थे।*
*(यूपी हैड देवेंद्र शर्मा देवू की कलम से)*
लोकसभा चुनाव2024 के मतदान की तिथियां नजदीक आती जा रही हैं।वैसे ही सभी प्रत्याशी चुनाव प्रचार को धार देने के लिए अपने अपने समर्थकों सहित डोर टू डोर मतदाताओं को अपने अपने दल को वोट देनें के लिए अनुनय विनय कर रहे हैं।महत्वपूर्ण तथ्य यह है, कि पूरे क्षेत्र की जनता अपने अपने काम मे ज्यादा जुटी नजर आ रही है, चुनाव में दिलचस्पी कम ले रही है।चुनाव प्रचार में वे ही लोग नजर आ रहे हैं, जो पूरी तरह ठलुआ हैं,या जिनके पास कोई काम धाम नहीं है।जिनमे कुछ चाटुकार और दलाल टाइप के लोग प्रत्याशियों को गुमराह करते हुए,एक ही जुमला कहते नजर आते हैं, कि क्षेत्र में तुम्हारे पक्ष में सब सॉलिड है, आज के दौर में हर वो व्यक्ति यह समझ चुका है, कि उसके पास ले देकर एक ही तो अधिकार बचा है, वो भी वोट का उसके वोट की भी कुछ छुटभैये नेता,और दलाल चाटुकार ठेकेदारी ले रहे हैं, यह हास्यास्पद मामला है।इस दौर में कोई व्यक्ति अपनी पत्नी के वोट की जिम्मेदारी नहीं ले पा रहा तो फिर ये चमचे किस दम पर ठेकेदारी ले लेते हैं, यह विचारणीय पहलू है।फर्रुखाबाद लोकसभा क्षेत्र से दो बार के भाजपा सांसद मुकेश राजपूत अपने पांचों विधायकों मेजर सुनील दत्त,सुशील शाक्य, नागेंद्र सिंह राठौर,डॉ0सुरभि गंगवार,ठा0सत्यपाल सिंह राठौर के अलावा अपने भाजपा समर्थकों कार्यकर्ताओं के बल पर लगातार चुनाव प्रचार को गति देते हुए डोर टू डोर वोट मांग कर तीसरी बार हैट्रिक लगाने की तैयारी में नजर आ रहे हैं।वही सपा प्रत्यासी डॉ0नवल किशोर शाक्य भी एड़ी चोटी का जोर लगाकर अपने समर्थकों सहित भाजपा की हैट्रिक को रोकने के लिए भरसक प्रयास करने में जुटे हैं।फर्रुखाबाद लोकसभा क्षेत्र के यादवों की हालत सांप छछूंदर जैसी हो गई है।कारण लोकसभा2014 का चुनाव जिसमें रामेश्वर सिंह यादव ने सपा के प्रत्यासी की हैसियत से चुनाव लड़ा था,और 2,55,693 मत प्राप्त किए थे,जबकि भाजपा प्रत्यासी मुकेश राजपूत को 4,06,195 मत प्राप्त हुए थे।उममें सपा प्रत्याशी रामेश्वर सिंह लगभग 1डेढ़ लाख वोट से चुनाव हार गए थे।उस समय शाक्यों ने रामेश्वर सिंह को वोट किया होता तो सपा जीत जाती।आज यही सोच यादवों के अंदर देखने को मिल रही है, उसका हाल सांप छछूंदर जैसा है, यदि वह शाक्य प्रत्यासी को वोट करता है तो राजनीति यादवों की हांसिये पर चली जायेगी।फिर कभी यादव किसी भी राजनीतिक पद के लिए दावेदारी नहीं कर पायेगा,कारण स्पष्ट है, जिस जाति का जनप्रतिनिधि होता है, वह पहले अपनी जाति की भलाई के लिए कार्य करता है।यह कटुसत्य है।दूसरी तरफ फर्रुखाबाद के कद्दावर यादव नेता जो स्वयं भाजपा के सहयोगी हैं,जो स्वयं भी भाजपा को जिताने के लिए दिन रात एक किए हुए हैं।भाजपा प्रत्यासी मुकेश राजपूत के चुनाव पर केंद्र और प्रदेश दोनों के नेतृत्व की कड़ी नजर है।इसी के चलते सभी भाजपा विधायकों को आगाह आगाह किया जा चुका है, कि वे सभी आपसी भेदभाव भूल कर पूरी ताकत से जनता के मध्य जाकर मोदी जी के विकास के कार्यो को जनता तक पहुँचाकर उन्हें आश्वस्त करें कि मोदी जी हैं तो सब मुमकिन है।पीडीए के समीकरण पर लड़ रहे सपा प्रत्यासी भी इस बात से अपने को मजबूत मानकर चल रहे हैं कि पिछड़ा,दलित, अल्पसंख्यक के वोट के बल पर हम भाजपा की हैट्रिक रोक देंगे।अब फर्रुखाबाद लोकसभा पर जनता किसे मुकुट पहनाती है, यह चुनाव परिणाम बेहतर बताने में सक्षम होंगे।फिलहाल हम किसी से कम नहीं कि तर्ज पर हर कोई चुनाव जितने का दावा भर रहा है।