सीकरी लोकसभाअपनों की मार की आशंका से प्रभावित होगा क्या चुनाव?

आज की बात

फतेहपुर सीकरी खेरागढ़ फेतेहाबाद और बाह के अलावा शेष देहात विधान सभा में ये सच है कि सीकरी और देहात का गणित जिस पक्ष में जाएगा परिणाम उधर ही जाएगा । हालांकि बाह फतेहाबाद और खेरागढ़ के विधान सभाओं के मौसम का लोकसभा में बदला रंग दिखता है । यहां इस बार सीकरी क्षेत्र से दो बड़ी पार्टियों के उम्मीदवार होने का भी असर दिखेगा । वहीं खेरहढ़ से एक बड़ी पार्टी का उम्मीदवार है जिससे भी तीन विधानसभाओं को लेकर खड़े हुए उम्मीदवार इस बार चिंतित हो सकते हैं । एक बात जरूर है फिरोजाबाद से अगर बाह का उम्मीदवार उतरता है तो एक बड़े दल की अंदर की शक्ति जो छीड होती जा रही है को फिर से जान मिल सकती है ।
एक सर्वे के अनुसार वर्तमान सांसद के सामने संगठन के अलावा आम मतदाता के साथ संगम बिठाने की सबसे बड़ी चुनौती होगी । वहीं विधा सभा वार विकास कार्यों में भी शिकायती होने से उनका पक्ष कमजोर दिख रहा है । उनके लिए उनके दल के मठाधीश भी कम नोटा का प्रभाव नहीं घटा पा रहे हैं । दो तरफा मार से वे किस चतुराई से निजात पाएंगे यह उनकी कर्तव्य निष्ठा पर निर्भर करेगा ।
हम अगर विधानसभा वार अध्ययन करें तो सीकरी में सबसे ज्यादा उनके सांसद होने का लाभ मिला है । अपने ही निवर्मन सांसद के अधूरे कार्यों को तो वे पूरा कर ही नहीं पाए ऊपर से जो हुए थे उनको देख तक नहीं सके । अटल के गांव बटेश्वर को जो ऑल लेकर तत्कालीन उनकेदाल के सांसद ने सपना दिखाया था पूरा होना दूर वो उसे देख भी नहीं सके।
यहां वे आना जाना भी स्वतंत्र रूप से नहीं कर से । जिससे भी संगठन के लोग तक संतुष्ट नहीं दिख रहे हैं मगर अब पहले की तरह की हवा अंतिम छड़ों पर होने का इन्हें ई करना पड़ सकता है ।
फतेहाबाद में भी महत्वकांछित लोग कम नहीं हैं । हां यहां संगठन शहर से ज्यादा देहात में मुखरित है जिससे संयोजन संभव है ।जातीय और धार्मिक के साथ राजनेतिक तौर से यहां अगर दो पूर्व विधायक साथ होने से सकारात्मक पहलू दर्शाते हैं
रही खेरागढ़ में जिलाध्यक्ष की जाती अगर खुलकर उनके वर्तमान विधायक के रुख पर भी मतदाताओं को आकर्षित कर पक्ष में ला सकते हैं हालांकि यहां का गठबंधन का प्रत्याशी होने का भी असर दिख सकता है ।
निर्णायक देहात आउटर और फतेहपुर सीकरी विधान सभाएं हो सकती हैं ।
कांग्रेस भी इन दोनों विधान सभाओं के लिए मॉडल बन सकती हैं । ये उम्मीदवार के व्यवहार पर निर्भर करेगा।
अंत में फिलहाल फतेहपुर सीकरी का चुनावी ऊंट किस करवट बैठेगा कुछ भी नहीं कहा जा सकता ।
इस लोकसभा का सीमावर्ती होना भी दूसरे प्रांतों का माहोल भी कुछ असर दिखा सकता है ।
आओ हम अध्ययन कर अगले सांसद को चुनने के लिए पहले मतदान फिर ब्रेक फास्ट करें का नारा दे अपने दायित्व को निभाएं ।
शंकर देव तिवारी

बेमतलब की भी
सवाल विकास में अपना तेरे का जो बनता है का उत्तर भी आम मतदाता मांग रहा है ।
कारण समय क्षेत्र में न दे पाने का भी लोग जानना चाह रहे हैं ।
निधि से समान बंटवारे का हिसाब भी सार्वजनिक हो की चाहत है ।
दल बदल कर शामिल लोग क्या कर रहे हैं पर भी नजर रखने की जरूरत है ।

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

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