
,आरओ,की परीक्षा निरस्त, पुलिस की परीक्षा बिफल—
यानी इंसान के भविष्य पर डाका रोटियों की छीना झपटी छल और कपट से आखिर ये प्रचलन हुआ कहां से शुरू और खत्म क्यों नहीं हो पा रहा है यह सबसे बड़ी चुनौती है जिम्मेदारों की इसे बंद करवाया जाए क्योंकि ये बच्चों से लेकर हर पीढ़ी के लिए बहुत बड़ा अपराध ही नहीं कि इंसान के भविष्य पर छल और कपट का रोजगार का होना भविष्य की कोख से अधूरा भ्रूण खेंच कर इंसानों की जिंदगी और रोटियां छीनकर भूंख को लात मारकर भविष्य को उस दिशा में ले जाया जा रहा है जिसे आतंक कहते हैं क्योंकि आतंकी किसी मां की कोख से पैदा नहीं होता है परिस्थितियों—और यह अपनी जगह बिल्कुल सही है कि भूंख सिर्फ निवाला खाती है संस्कार नहीं जब पढ़ें लिखे इंसान रिक्शा और मजदूरी करेंगे तो देश का क्या होगा कॉम्पटीशन के पेपर, पेपर होने से पहले लीक होना दलाली और दंवगी का रोजगार ही नहीं जिम्मेदारों की खिल्लियां उड़ानें के बराबर है सर्मनाक धंधे को समय रहते बंद करना बहुत जरूरी हो रहा है वरना शिक्षा का कोई महत्व ही नहीं रह जाता है।
लेखिका, पत्रकार, दीप्ति चौहान।