जनपदीय साहित्यकार सम्मेलन में श्रीराम महिमा सुन भाव विभोर हुए दर्शक

एटा,कला एवं साहित्य की अखिल भारती संस्था संस्कार भारती के संयोजन में राजकीय कृषि एवं औद्योगिक विकास प्रदर्शनी एटा महोत्सव में जनपदीय साहित्यकार सम्मेलन एवं सम्मान समारोह का आयोजन हुआ। दीप प्रज्ज्वलन मुख्य अतिथि स्वागत पचौरी, विशिष्ट अतिथि सचिन उपाध्याय, प्रान्तीय अध्यक्ष मुकेश मिश्र, प्रांतीय संरक्षक आचार्य डॉ. प्रेमी राम मिश्र एवं जिला अध्यक्ष अनूप सिंह भावुक द्वारा किया गया। अतिथियों का स्वागत सह संयोजक प्रदीप सिंह तोमर व महेश मंजुल, डॉ राजेंद्र सिंह सिंह राज, डॉ विजय राघव, राहुल जैन एवं विकास शर्मा ने किया।

‘वर्तमान राष्ट्रीय परिप्रेक्ष में मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम की प्रासंगिता’ विषय पर बोलते हुए रोहन लाल चतुर्वेदी इंटर कॉलेज एटा के प्रधानाचार्य विजय कुमार मिश्र ने कहा कि श्री राम के जीवन की महानता इसी बात से प्रतीत होती है कि त्रेता युग से लेकर आज तक उनके आदर्श जीवन का गुणगान किया जाता है ।वे अपने श्रेष्ठ गुणों के कारण आज भी प्रासंगिक हैं। कविवर बलराम सरस ने उनके मर्यादित जीवन की अनुकरणीय विशेषताओं पर प्रकाश डाला ।जवाहरलाल नेहरू कॉलेज एटा की पूर्व प्राचार्य डॉ सुनीता सक्सेना ने श्री राम के जीवन से संबंधित विविध प्रसंगों का उदाहरण सहित विवेचन कर उनकी प्रासंगिकता के महत्व का आकलन किया। जे.एल.एन. कॉलेज एटा के पूर्व संस्कृत विभाग अध्यक्ष डॉ सुभाष दीक्षित ने बाल्मीकि रामायण, उत्तर रामचरित और रामचरितमानस के अनेक प्रसंगों के माध्यम से श्री राम के आदर्श जीवन का अनुकरण करने की प्रेरणा दी। आचार्य डॉ प्रेमी राम मिश्र ने कहा कि श्री राम ने लोक मानस को विशेष महत्व दिया। इसीलिए उनका चरित्र मानव समाज के लिए आदर्श बन गया ।वे ही एकमात्र ऐसे व्यक्ति हैं जिन्हें मर्यादा पुरुषोत्तम के रूप में मान्यता प्राप्त हुई। उनका चरित्र समसामयिक चेतना और व्यवहार का अद्भुत समन्वय प्रस्तुत करता है। उनके आदर्श का अनुकरण करके ही हमारा देश विश्व गुरु का गौरव प्राप्त कर सकता है। संस्कार भारती के जिला अध्यक्ष अनूप भावुक ने श्री राम के जीवन को प्राणी मात्र के लिए अनुकरणीय बताया ।उन्होंने कहा की राम का जन्म मानव रूप में मर्यादा का अनुपम उदाहरण है ।

कार्यक्रम में इशिका तोमर ने संस्कार भारती के ध्येय गीत पर सांस्कृतिक प्रस्तुति दी। सरस्वती वंदना खुशी, ट्विंकल, यति , प्रगति द्वारा प्रस्तुत की गई। इशिका व श्रेया तोमर ने अनादि अनंत, नमो नमो, रघुपति राघव राजाराम पर शास्त्रीय नृत्य की प्रस्तुति दी। डॉ सोनम गुप्ता के भजनों ने समा बांध दिया।

दीक्षा भारती के कजरी ने खूब वाहवाही लूटी। सृस्टि सिंह की भरतनाट्यम विद्या में नृत्य प्रस्तुति पर दर्शक मंत्र मुग्ध हो गए। अंत में प्रथम परमार के गीतों पर पूरा पंडाल झूम गया।

इस अवसर पर संस्कार भारती के प्रान्तीय संरक्षक के रूप में डॉ दिनेश वशिष्ठ, जिला संरक्षक के रूप में वीरेंद्र वार्ष्णेय, यू पी सिंह, गौतम सिंह सर्राफ, पालक अधिकारी के रूप में सुभाष दीक्षित एड, डॉ अनुज शर्मा की गरिमामयी उपस्थिति रही।

इस अवसर पर सभी प्रस्तुति करने वाले कलाकारों तथा 26 जनवरी को नगर के विभिन्न स्थानों पर भारत माता पूजन कार्यक्रम करने वाले 70 संयोजकों का सम्मान किया गया।

कार्यक्रम में सुरेंद्र कुमार, रशीद अली, अरुणा देवी, आरजू पांडेय, कीर्ति सूर्यकांत परमार, प्रेमबाबू कुशवाह, अशोक चौहान, डॉ राजेंद्र राज, निशा शर्मा, पुष्पेंद्र सिंह, केशव मिश्र, राकेश कुमार, संतोष यादव, विजेंद्र तिवारी, कृष्ण मुरारी, विमल शर्मा, नीरज कुमार, सचिन, वैभव जैन, राजेश शर्मा, पुनीता यादव, अलका राठौर, रामौतार आर्य, देवेंद्र लोधी एड , महिपाल सिंह आदि उपस्थिति रहे। इस अवसर पर डॉ उमा सोलंकी के ‘इतिहास के स्वर्ण अक्षर’ एवं डॉ विनोद कुमार (आचार्य ब्रह्म विनोद शाश्वत )के शोध -प्रबंध ‘नवगीत की सार्वभौमिक सार्थकता ‘का विमोचन किया गया।

कार्यक्रम का संचालन मंयक तिवारी ने किया। अंत में कार्यक्रम संयोजक डॉ सुधीर पालीवाल ने सभी आभार व्यक्त किया।

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

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