करोड़ों रुपए में एटा महोत्सव

*खेल तमाशा में खेल*

लखनऊ -उत्तर प्रदेश में 22 जनवरी की Exclusive तैयारी में प्रधानमंत्री लगे हैं, मुख्य मंत्री तैयारी की मोनीटरिंग में लगे हैं, इधर जनपद एटा में एटा महोत्सव में रामपुर से अवरार करोड़ो रुपए का ठेका ले कर उगाई के खेल की तैयारी में लग गया है, आपको बताते चलें ठेके का 10 प्रतिशत जमा करा के खेल तमाशा में खेल खेलने को तैयार हो जाता है, अब एटा जिले के बासिन्दो की जेब में डाका डालने का नया खेल का नाम एटा महोत्सव है,जब ठेका बीस लाख में सन् 2018 तक उठा था,तब गरीब अपने बच्चों को दस रुपए में खिलोने खरीद कर दिला देता था,एक डकैत आईएएस आया उसने डकैतों के एक गैंग से मिलकर सन् 2019 में ठेका एक करोड़ बारह लाख रुपए में उठा दिया था, अपनी जेब भरके ले गया,अब 2024 तक ठेका एक करोड़ पचास लाख रुपए से ज्यादा पहुंच गया है,अब खेल तमाशा में खेल आईएएस करता है, नीचे बाले जी हजूरी में दिन रात मेहनत करने में लगे हैं, अब बात आती है,एटा महोत्सव में आयोजित संयोजक को चंदा धंधा करने का सौभाग्य परिजनों के साथ शुरू सफर नामा और पत्तल चाटने के नाम पर धोड़ा सा धन आईएएस चैक देकर खेल तमाशा में खेल कर जाता है, और अपना बोरिया-बिस्तर में धन दवा लेता है, आखिर असली खेल तमाशा का जमूडा कौन…?

*पुलिस फोर्स बेगार करके सरकार को लगा रही चूना*
पुलिस फोर्स सरकार से तनख्वाह ले रही है, लेकिन बेगार एटा महोत्सव में कर रही है, पुलिस विषेशज्ञों की माने तो तो एटा महोत्सव 2024 जब करोड़ों रुपए से ऊपर का टेंडर से रकम हासिल कर रहा है, तो पुलिस एवं पीएससी के जितने जवान ड्यूटी करें उनका वेतन एटा महोत्सव को देना चाहिए, लेकिन आईएएस के इशारे पर नाचते बाले आईपीएस फ्री में सुरक्षा मुहैया करा कर सरकार को चूना लगा देता है, अगर सही से कोई शिकायत कर्ता शिकायत करें, तो जी हजूरी आइपीएस अधिकारी को अपने बेतन से कटौती करनी पड़ेगी,

देश संविधान से चलता है, न कि चापलूसी करने है,आज कल का ट्रेलर चापलूसी चल रहा है,

*प्रतिनिधि मौन तो बात रखें कौन*

ब्रज में एक कहावत है जो यहां सटीक बैठती है,राठ के सुहागिन पैर लागे बहिना हो जा मोई सी सो प्रति निधि को चल रहो है, जिनके घर शीशे के होते हैं, दूसरों के घर पर पत्थर फेंके नही जाते हैं, प्रति निधि मौन का सबसे बड़ा कारण यही है,तू काण्डा मैं काण्डा मैं न देखूं तोय तू न देखें मोय

*जनता तो लुटने के लिए बनी*

सर्वे आज बताते हैं, रूपए जनता पर है, जनता पर टैक्स लगा कर सरकारी खजाने भरते हैं, सरकार पर कोई अलादीन का चिराग नही है, आईएएस अधिकारी सरकार में काम करते समय जान जाता है, और जनता को लूटने के फंडे एक समिति बनाई और उसका बैंक खाता घोला और ठेका उठाया खेल तमाशा में खेल कर गया है,जब साढ़े पांच सौ की मजूरी पूरे दिन मजदूर ने की साम को बच्चों ने मेला देखने गए, और मेले में खिलोने खरीद ने में जेब में डाका सीधे तौर पर आईएएस अधिकारी का है,

*महोत्सव के दुकानदारों ने क्या कहां*

मेला में हमें छोटी सी दुकान दस हजार से बीस हजार रूपए में मिल जाती थी,अब सत्तर हजार में चाय बेचने की दुकान मिली है, तो चाय गुटा बीड़ी पर रुपए तो बड़ेगे, ऐसे ही बड़ी दुकान का हाल है, जिसमें सोफटी,ढावा, अन्य सामान की दुकाने जैसे बच्चो की गुड़िया 10रुपये में बेचते थे,हर समान महंगा ठेकेदार जिम्मेदार है, लेकिन ठेकेदार कहता है,जब आईएएस अधिकारी डेढ़ करोड़ में ठेका दे रहा है, और अलग से ऊपर नम्बर दो में ले रहा है, तो हम क्या करें,
खेल तमाशों में खेल करने वाले असली जमूडा मिला आईएएस ? नाम तो जानी गये होगे…..

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

यह खबर /लेख मेरे ( निशाकांत शर्मा ) द्वारा प्रकाशित किया गया है इस खबर के सम्बंधित किसी भी वाद - विवाद के लिए में खुद जिम्मेदार होंगा

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