नगरीय क्षेत्रों से निकलने वाले वेस्ट पानी से बनेगी बिजली



एटा। थर्मल पावर प्लांट में बिजली बनाने के लिए एटा और कासगंज के घरों से निकलने वाले वेस्ट पानी का उपयोग किया जाएगा। जल निगम ने पीएफआर बनाकर थर्मल पावर प्लांट के उच्चाधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत की है। इस पर दोनों ही संस्थाओं की सहमति बनने के साथ बजट स्वीकृत होते ही निर्माण कार्य शुरू होगा।
जल निगम नगरीय असिस्टेंड इंजीनियर रवेंद्र कुमार ने बताया कि थर्मल पावर प्लांट में बिजली बनाने के लिए नहर के सिंचाई एवं पीने योग्य पानी का उपयोग न करते हुए नगरीय क्षेत्रों से निकलने वाले वेस्ट पानी का उपयोग किया जाए। यह केंद्र सरकार चाहती है कि जो पानी सिंचाई और पीने के लिए प्रयोग में लाया जा सकता है उस पानी को बिजली बनाने में प्रयोग न किया जाए। जवाहर तापीय विद्युत परियोजना के चीफ इंजीनियर को एटा एवं कासगंज के घरों से प्रतिदिन निकलने वाले वेस्ट पानी को ट्रीटमेंट प्लांट में सोधित कर बिजली बनाने में उपयोग करने के लिए प्रस्ताव दिया गया है। इन दोनों शहरों के वेस्ट पानी को पावर प्लांट तक पहुंचाने के लिए एक टरसरी ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण एवं कासगंज से एटा तक वेस्ट पानी लाने के लिए पाइप लाइन बिछाई जानी है। इसकी अनुमानित लागत 438 करोड़ के आसपास आने की उम्मीद है।

3.50 करोड़ लीटर वेस्ट पानी निकलता है एटा-कासगंज से जल निगम नगरीय असिस्टेंड इंजीनियर ने बताया कि एटा शहर की तीनों फेज की सीवर लाइन शुरू होने के बाद मानपुर स्थित शहर के 24 एमएलडी क्षमता वाले एचटीपी में प्रतिदिन दो करोड़ लीटर वेस्ट पानी आएगा। ट्रीट करके टरसरी ट्रीटमेंट प्लांट में भेजा जाएगा। वहीं कासगंज के घरों से प्रतिदिन निकलने वाला 1.5 करोड़ लीटर वेस्ट पानी वहां बने 15 एमएलडी क्षमता वाले एचटीपी से ट्रीट होकर पाइप लाइन के माध्यम से प्रतिदिन एटा आएगा। इसे टरसरी ट्रीटमेंट प्लांट के माध्यम से थर्मल पावर प्लांट में भेज दिया जाएगा। इस प्रकार दोनों शहरों से प्राप्त 3.50 करोड़ लीटर वेस्ट पानी थर्मल पावर प्लांट में बिजली बनाने के मुहैया कराया जाएगा। उन्होंने बताया टरसरी ट्रीटमेंट प्लांट बनाने के लिए दो हेक्टेयर भूमि की मांग की गई है। मंजूरी मिलने के बाद प्रोजेक्ट की डीपीआर बनाई जाएगी।
थर्मल पावर प्लांट को प्रतिदिन चाहिए आठ करोड़ लीटर पानी

जवाहर तापीय विद्युत परियोजना के चीफ इंजीनियर अजय कुमार के अनुसार थर्मल पावर प्लांट में प्रतिदिन 1320 मेगावाट बिजली बनाने के लिए प्रतिदिन आठ करोड़ लीटर पानी का उपयोग होगा। इसके लिए बेवर ब्रांच नहर से पानी की आपूर्ति ली जाएगी। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार के आदेशानुसार नहर के ताजे पानी का उपयोग बिजली बनाने में कम से कम करने के आदेश है। उसके चलते एटा एवं कासगंज के घरों से निकलने वाले वेस्ट पानी का उपयोग करने के लिए टरसरी ट्रीटमेंट प्लांट (टीटीपी) बनाने एवं कासगंज का वेस्ट पानी एटा तक पाइप लाइन के माध्यम से लाने के लिए एक प्रोजेक्ट जल निगम ने बनाकर दिया है। इसे शासन को भेजा गया है। चूंकि यह प्रोजेक्ट काफी ज्यादा बजट का है। इसके लिए बजट मंजूर करने से पहले कई प्रकार के निर्णय शासन स्तर से ही लिए जा रहे हैं।

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

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