हाँ ठीक है! 3 राज्यों में चुनाव हार गए!!

विपक्षियों को तो छोड़ ही दें, कांग्रेस की विचारधारा वाले खुद बोलने लग गए कि गांधी परिवार जब तक रहेगा, यही होगा।
उन्हें ही ये जवाब देना चाहूंगा कि आपने क्या किया..?
खैर ये घर की बात है। विचार न मिलने पर हर घर में बर्तन खनकते है। आवाज भी बाहर तक सुनाई देती है। यहाँ पर भी सुनाई दी है। पर कभी आपने सोचा कि जाने अंजाने आप भाजपा की बातों से कन्वेंस होने लग गए है ?
भाजपा हमेशा से गांधी परिवार पर आक्रामक रही है। अगर आप भी हो गए तो क्या फर्क रह जाएगा उनमें और आपमें?
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अब असल बात करें तो गांधीवादी विचारधारा फिलहाल में सिर्फ गाँधी परिवार से ही जिंदा है।
तंज कसने वालों की बात एक बहती हुई धारा मात्र है जो हर जगह बह रही है और आप भी उस धारा के साथ अपने हाथ धूल रहे है। पर सच्चाई यही है कि गांधी परिवार अगर न रहे तो कांग्रेस समाप्त हो जाएगा। बिन मुखिया परिवार कैसा रहता है जानते ही है न? लोग इल्ज़ाम लगाते है कि सारे फैसले गांधी परिवार ही लेता है, नए नेतृत्व को मौका नहीं देता।
अरे !! सारी कुर्सियां और गद्दियों को तो छोड़ ही दिए है। कभी देखा है सोनिया, राहुल या प्रियंका जी को कोई मंत्री पद लेते हुए?
अब पब्लिक और संगठन के विचारवान कार्यकर्ताओं की एक्सेप्टेंस उन्ही के साथ है तो क्या बोलोगे?
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आपको संघ के हिंदुत्व और शास्त्र के हिंदुत्व में फर्क करना सीखना चाहिए।
एक तरफ संघ के हिंदुत्व में हर तरफ नफ़रत है। फूहड़ गालियां है। बद्तमीजी भरा लहजा है। ख़िलाफ़त करने वालों की माँ से लेकर बहन तक कि इज़्ज़त उतार लेने वाला घटियापना है।
वहीं दूसरी तरफ शास्त्र का हिंदुत्व सेक्युलर है। शास्त्र के हिंदुत्व में भाईचारा है। शास्त्र का हिंदुत्व नफ़रत मिटाता है। शास्त्र का हिंदुत्व गांधीवादी है। शास्त्र का हिंदुत्व वेद और पुराणों का वास्तविक ज्ञान है।
गांधी ने यूँ ही नहीं कहा था।
“ईश्वर अल्लाह तेरो नाम। सबको सन्मति दे भगवान।”
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गांधी ने कभी संघ से नफ़रत नहीं की। पर संघ गांधी से नफरत करता है। हर साल गांधी के जयंती और पुण्यतिथि में ट्विटर का ट्रेंड चेक करो। संघी नफ़रत का उदाहरण पहले पायदान पे शोर मचाता दिखाई देता है। गांधीवादी अहिंसा के परिचायक है और संघ की विचारधारा में हिंसा जायज है।
इसीलिए संघ डरता है शास्त्र के हिंदुत्व से। संघ डरता है गांधीवादी विचारधारा से। संघ डरता है गांधी परिवार से।
क्योंकि गांधी परिवार ही इस विचारधारा की विरासत को जिंदा रखे आगे बढ़ रहा है। क्योंकि गांधीवादी विचारधारा ही संघ के लगातार फैलाए जा रहे नफ़रत के जहर पर एंटीडोज का काम कर रहा है।
यही है असली और नकली हिंदुत्व के बीच का असली फर्क!!
पॉइंट टू बी नोटेड! भारतीय जनता पार्टी की विचारधारा संघ की प्लांटेड की हुई विचारधारा है। यहां आपको सरस्वती वंदना भी ठीक से ना पढ़ पाने वाले हिंदुत्व पर ज्ञान देते हुए आसानी से मिल जाएंगे क्योंकि इन्हें संघ के हिंदुत्व से मतलब है। शास्त्र के हिंदुत्व से इनका कोई वास्ता नहीं।
जबकि शास्त्र के हिंदुत्व में शिक्षा है। सरस्वती है! ज्ञान है! बुद्धि है! विवेक है!