2दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के द्वितीय प्लेनरी सत्र एव समापन सत्र का आयोजन किया गया।

दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के द्वितीय प्लेनरी सत्र एव समापन सत्र का आयोजन किया गया।

वाराणसी

आज दिनांक 04 दिसम्बर 2023 को गांधी अध्ययनपीठ के गांधी सभागार में समाज कार्य विभाग महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ एवं इंडियन काउंसिल ऑफ सोशल साइंस रिसर्च, नई दिल्ली आई.सी.एस.एस.आर द्वारा प्रायोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के द्वितीय प्लेनरी सत्र एवं समापन सत्र का आयोजन किया गया। राष्ट्रीय संगोष्ठी के द्वितीय प्लेनेरी सत्र का आयोजन सभी गणमान्य अतिथियों को पुष्प गुच्छ स्मृति चिन्ह एवं अंगवस्त्रम् देकर स्वागत एवं अभिनंदन किया गया। द्वितीय प्लेनेरी सत्र की अध्यक्षता प्रो. आर.पी सिंह अंग्रेजी विभाग महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ द्वारा की गई। इस सत्र के मुख्य वक्ता प्रो. जुबैर मिनाई समाज कार्य विभाग जामिया मिल्लिया इस्लामिया नई दिल्ली प्रो. शैला परवीन, समाज कार्य विभाग महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ एवं श्रीमति मधु चैधरी भट्ट स्वतंत्र शोधकर्ता एवं ब्लॉगर ने अपना अकाद्मिक व्याख्यान प्रस्तुत किया। प्रो. जुबैर मिनाई ने अपना व्याख्यान बच्चों तक न्याय की पहुंच विषय पर प्रस्तुत किया और बताया की भारतीय संविधान द्वारा बच्चों के मूलभूत अधिकारों को कई अनुच्छेदों द्वारा संरक्षित किया गया है। कोविड 19 के बाद बच्चों की सीखने की प्रक्रिया में जो कमी आई है उस पर चर्चा करते हुए उन्होने इस समस्या को दूर करने के उपायों पर भी चर्चा की। तत्पश्चात् प्रो. शैला परवीन द्वारा भारतीय समाज में अल्पसंख्यक वर्ग संघर्ष चुनौतियां और संभावनाएं विषय पर व्याख्यान प्रस्तुत किया और बताया की देश के धार्मिक अल्पसंख्यक समुदायों को सामाजिक आर्थिक राजनैतिक एवं विधिक क्षेत्रों में न्याय की 75 वर्षों की यात्रा के बाद भी गंभीर समस्याओं और चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। श्रीमति मधु चैधरी भट्ट ने पॉवर प्वाइंट प्रस्तुतीकरण के द्वारा न्याय की राह विषय पर व्याख्यान प्रस्तुत किया और पांच ई पर चर्चा की जिनमें सशक्तिकरण शिक्षा समानुभूति समानता भावात्मक बुद्धि सम्मिलित है। इन सभी का मानव व्यक्तित्व के विकास में महत्वपूर्ण योगदान है। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में वास्तविक न्याय के संबंध में अपने विचार रखते हुये प्रो. आर. पी. सिंह ने न्याय के तीन प्रकार जैसे सामाजिक आर्थिक राजनीतिक न्याय पर चर्चा की साथ ही उन्होंने भारतीय संविधान के द्वारा एस. सी एस.टी ओ.बी.सी एवं ई.डब्ल्यू.एस. के आरक्षण के विषय में विस्तार से बताया। द्वितीय प्लेनरी सत्र का संचालन एवं धन्यवाद ज्ञापन प्रो. वंदना सिंन्हा द्वारा किया गया। इसके पश्चत् लंच का आयोजन हुआ। जिसके उपरांत दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के समापन सत्र मे सभी गणमान्य अतिथियों को पुष्प गुच्छ स्मृति चिन्ह एवं अंगवस्त्रम् देकर सम्मानित किया गया। समापन सत्र की अध्यक्षता प्रो. महेन्द्र मोहन वर्मा संकायाध्यक्ष एवं विभागाध्यक्ष महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ द्वारा किया गया। समापन सत्र में मुख्य अतिथि डॉ. पी. नाग पूर्व कुलपति महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ विशिष्ट अतिथि प्रो. संजय भट्ट पूर्व विभागाध्यक्ष समाज कार्य विभाग दिल्ली विश्वविद्यालय नई दिल्ली प्रो. संजय पूर्व संकायाध्यक्ष एवं विभागाध्यक्ष समाज कार्य विभाग म. गां. काशी विद्यापीठ संगोष्ठी संयोजक प्रो. अनिल कुमार चैधरी एवं संगोष्ठी सचिव प्रो. निमिषा गुप्ता उपस्थित रहें। अतिथियों का वाचिक स्वागत और अभिनंदन प्रो. संजय समाज कार्य विभाग काशी विद्यापीठ द्वारा किया गया। उन्होने अपने उद्बोधन में बताया की काशी विद्यापीठ के संस्थापकीय विद्यार्थी भी न्याय की यात्रा में सम्मिलित रहे हैं और काशी विद्यापीठ में समाज कार्य विभाग की स्थापना का उद्देश्य भी समाज में व्याप्त कुरीतियों को समाज कार्य द्वारा दूर करने के लिए किया गया था। तत्पश्चात प्रो. निमिषा गुप्ता ने दो दिवसीय संगोष्ठी में संपन्न हुए उद्घाटन सत्र 2 प्लेनरी सत्र एवं 6 समानान्तर तकनीकी सत्रों का समग्र प्रतिवेदन विवरण प्रस्तुत किया। समापन सत्र के विशिष्ट अतिथि प्रो. संजय भट्ट ने अपने व्याख्यान में सामाजिक न्याय की यात्रा के विषय में और समाज कार्य विषय के संघर्ष चुनौतियों पर चर्चा की। इन्होंने सामाजिक न्याय और मानव अधिकार के संबंध में बताते हुए श्रमिक विधान और औद्योगिक संबंधों की व्याख्या की। भारतीय संविधान के भाग चार में दिए गए नीति निर्देशक तत्व अनुच्छेद 36-51 पी.आई. एल. आर.टी.आई. आर.टी.इ. के द्वारा नागरिकों को प्राप्त होने वाले न्याय जनसांख्यिकी के माध्यम से होने वाले प्रवास एवं परिवर्तन पर प्रकाश डाला। समापन सत्र के मुख्य वक्ता डॉ. पी. नाग ने अपने व्याख्यान में बताया के समाज कार्य सरकार और नागरिकों के बीच एक सेतु का कार्य करता है और गैर सरकारी संस्थाओं संगठनों की भूमिका इस सेतु के निर्माण में महत्वपूर्ण होती है। इन्होंने गांधी जी के सहभागिता प्रारूप पर चर्चा करते हुए बताया की समाज कार्य को भूगोल के क्षेत्रीय प्रारूप के समान कार्य करने की आवश्यकता है उन्होने इसे एक उदाहरण द्वारा पोस्टमैन पुलिस एवं पटवारी की व्यवस्था सरकार के रूप में समाज में कार्य करती थी आज जनता किस प्रकार अपने कल्याण के लिए सरकार का चुनाव करती है इसको बताया। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रो. महेन्द्र मोहन वर्मा ने नेशनल एसोसिएशन प्रोफेशनल ऑफ सोशल वर्क एन. ए. पी. एस. डब्ल्यू. आई. के कार्यों की सराहना की। इस संगोष्ठी के माध्यम से होने वाले अनुभव के साथ समाज कार्य विभाग द्वारा आगे और नए उद्देश्यों को प्राप्त करते हुए निरंतर प्रयंतनशील रहने का सुझाव दिया। समापन सत्र का संचालन श्रीमती भारती कुरील द्वारा किया गया एवं धन्यवाद ज्ञापन प्रो. अनिल कुमार चैधरी द्वारा किया गया। कार्यक्रम में विभिन्न संकायो विभागों के संकायाध्यक्ष विभागाध्यक्ष अध्यापकगण शोधार्थी एवं प्रतिभाीगण तथा समाज कार्य विभाग के कर्मचारीगण उपस्थित रहें।

About The Author

निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

यह खबर /लेख मेरे ( निशाकांत शर्मा ) द्वारा प्रकाशित किया गया है इस खबर के सम्बंधित किसी भी वाद - विवाद के लिए में खुद जिम्मेदार होंगा

Learn More →

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

अपडेट खबर के लिए इनेबल करें OK No thanks