
उत्तर प्रदेश – कडा संघर्ष बढ़ती जनसंख्या और कम रोजगार. ढलती उम्र को लेकर युवा है परेशान ,
सरकार बनाने के बाद जनता को खुश रखना टेढ़ी खीर है , और जब नौकरशाही हावी हो तो कुछ कहना ही नहीं, क्योंकि नौकरशाहों को सबसे ज्यादा वेतन और सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन भी मिलेगी, इसलिए वह आम जनता की चिंता नहीं करते , कुछ नौकरशाह तो सरकार को यह समझने में लगे रहते हैं कि जल्दी रिजल्ट निकलने पर वेतन देना पड़ेगा, और जितना लेट होगा उतना ही वेतन बचेगा , इससे तो लगता है कि वेतन पार्टी फंड से आते हैं , और आम जनता अपने पड़ोसी को देखकर ताना बुना बुनती और अपने विचार रखती है , सबसे बड़ी समस्या बेरोजगारों की है जो रोजगारों के लिए इधर-उधर भटक रहे है , पड़ोसी राज्य बिहार में 19 जुलाई से लेकर 22 जुलाई तक अध्यापकों के पेपर हुए, और एक अक्टूबर को रिजल्ट घोषित कर दिया गया , और नियुक्ति पत्र भी जारी कर दिया गया . दूसरी तरफ उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग ने ग्राम पंचायत, ग्राम विकास और समाज कल्याण अधिकारी की परीक्षा 26 और 27 जून को कराया जिसमें 18 लाख लोगों ने फॉर्म भरा था ,और परीक्षा देने लगभग 5 लाख लोग आए, क्योंकि अभ्यर्थियों को आयोग विश्वास नहीं दिला पाया ,उसके बावजूद भी अभी तक रिजल्ट जारी नहीं किया गया, अभ्यर्थी घूम घूम कर बिहार से तुलना कर रहे हैं , इतना ही नहीं कुछ दिन पहले ANM संविदा का रिजल्ट आया और 1 साल के बाद ,