पहले जलाते थे पराली अब कमा रहे मोटी रकम

पहले जलाते थे पराली अब कमा रहे मोटी रकम

एटा, । धान की पराली मुसीबत और पर्यावरण के लिए बड़ा संकट बनी हुई थी। पराली न जलाने एवं पराली का सदुपयोग करने के संबंध में वृहद स्तर पर जागरूक किया जाए। पराली नहीं जलाई। इन लोगों को पुआल से मुनाफा हो गया।

खेतों में ही पुआल दो हजार रुयये प्रति बीघा से 2500 रुपये प्रति बीघा तक बिक सकी। ऐसे किसानों को सम्मानित किया गया है। डीएम प्रेम रंजन सिंह की अध्यक्षता में कलक्ट्रेट सभागार में पराली प्रबंधन करने वाले किसानों को सम्मानित किए जाने के लिए कार्यक्रम का आयोजन किया गया। ब्लॉक शीतलपुर क्षेत्र के 06 किसान, सकीट के 06, मारहरा के 09, निधौलीकलां के 05, अवागढ़ के 06, जलेसर के 06, जैथरा के 06, अलीगंज के 06 सहित कुल 50 कृषकों को प्रशस्ती पत्र देकर एवं शॉल उड़ाकर सम्मानित किया गया। आयोजित कार्यक्रम के दौरान देव सिंह निवासी ग्राम विजयपुर ब्लाक मारहरा, गोपाल मिश्रा निवासी ब्लाक जैथरा, प्रताप सिंह वर्मा निवासी ग्राम विजयपुर ब्लाक मारहरा, मुकेश कुमार यादव निवासी ग्राम छछैना ब्लाक सकीट आदि किसानों ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि उन्होंने बड़ी संख्या में धान की फसल करने के बाद पराली के सदुपयोग किया। उन्होंने बताया कि वे पराली से आत्मनिर्भर की दिशा में कार्य कर रहे हैं और पराली प्रबंधन से प्रतिवर्ष लगभग 20-50 हजार रूपये की आमदनी करते हैं। कुछ किसानों ने बताया कि वह पराली के छोटे-छोटे बंडल बनाकर पशुपालकों को विक्री करते हैं, जिससे उनकी अतिरिक्त आय होती है। सीडीओ डॉ. एके बाजपेयी, डीडी कृषि रोताश कुमार, जिला कृषि अधिकारी डॉ. मनवीर सिंह सहित अन्य संबंधित अधिकारीगण, भारी संख्या में किसान भाई मौजूद रहे।

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

यह खबर /लेख मेरे ( निशाकांत शर्मा ) द्वारा प्रकाशित किया गया है इस खबर के सम्बंधित किसी भी वाद - विवाद के लिए में खुद जिम्मेदार होंगा

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