
साइकिल फूल व पंजा के जमीन में बोई गई गन्ने की फसल 2023 में आंखे खोली है
हर कोई सुगर फ्री गन्ना चूसने को मजबूर क्यों न हो, 20 साल की मेहनत का फल है जो अक्टूबर 2023 में जन्म हुआ
मैहर। अभी गन्ने की जन्म की बरहो भी नही मना पाए नारायण, और अपने ही सबसे पहले कोई अय्याशी की उपाधी दे दिया, तो कोई रावण की उपाधी दे दिया, तो कोई जबरिया गले मे पट्टा डालने का जबकि तस्वीर कुछ और ही बयान कर रही है। चर्चाएं तो बहुत है क्षेत्र में बुद्धजीवियों के बीच मे की जिला बनाने वाला अब इतना तो कमजोर नही होगा कि अपनी पार्टी बना लिया कुछ तो बजूद था तब तो अपनी पार्टी बनाकर नारायण त्रिपाठी ने मैहर की नाक ऊची कर दी यह बात अभी शायद किसी को समझ मे नही आ रही है इसलिए दो महीने पहले तो जिसके आने की लोग मैहर में राह देखते थे और आते ही सबसे पहले सेल्फी लेने की होड़ मच जाती थी और ताबड़तोड़ वाट्सएप से लेकर फेसबुक पर अपडेट कर दिया जाता था ताकि नारायण त्रिपाठी को दिखा सके कि हम आपके कितने चहेते है, यह बात बताने में यह वही लोग रहते थे जिनका उल्टे सीधे व्यपार था, आज इस बात का शाबाशी देने वाले अपने कम हो गए नारायण त्रिपाठी क्योकि उन्होंने अपनी पार्टी विन्ध जनता पार्टी बना डाली। जबकि मैहर के लिए यह बहुत बड़ी बात व उपलब्धि है। इस पर लोगो ने ध्यान नही दिया, लाख बुराइयां नारायण त्रिपाठी की हो सकती है लेकिन विन्ध प्रदेश बने या न बने वो केंद्र सरकार व राज्य सरकार जाने क्या करना है या नही करना है, लेकिन विंध्य जनता पार्टी की पुनःनिर्माण होना ही मैहर के लिए शौभाग्य की बात है और उसको धरातल में ताबड़तोड दौड़ा देना ये कोई छोटी बात नही है, नेता ही नेता की कमियां बता सकता है यह कड़वा सच भी है, लेकिन नारायण त्रिपाठी क्या पहले नेता है जो अपने आपको गरीब कहते है? नही? ज्यादातर नेता गरीब अपने आप को कहता है वो बात अलग है कि चुनावो में करोड़ो खर्च हो जाते है तो क्या किसी नेता के घर मे नोटो का पेड़ लगा है नही? उदाहरण जब एक व्यपारी अपनी दुकान खोलता है तो अगर 10 हजार की पूंजी लगाता है तो पूंजी सहित मान लीजिए 15 हजार निकला है जिसमे 5 हजार की बचत होती है, उस 5 हजार में भी दुकान का किराया, बिजली का बिल, कर्मचारी का वेतन, परिवार का खर्च, आगे खुल लोग समझदार है? ठीक उसी तरह नेता गिरी भी ऐसा ही है चुनावो में करोड़ो खर्च करते है तो वो भी अपने अपने तरीक़े से कमाए हुए होते, और करोड़ो खर्च के बाद जब चुनाव जीत जाते है उसी खर्च किये हुए रुपयों को सैकड़ो गुना कमाते है, अब कोई इतना बड़ा दयालु तो नही है देश मे की चुनाव जीतने के बाद इतना लंबा खर्च करने के बाद फ्री सेवा में लग जायेगा, उसी तरह नेता जनता की सेवा के साथ अपना किया हुआ खर्च भी किसी न किसी रूप में निकालता है, तो इसको लोग क्या कहेंगे आखिर चुनाव में इतना खर्च कर और एक दूसरे पर शब्दो से कीचड़ उछाल कर जितने के लिए सारे दाव लगा देते है, सोचने वाली बात की क्या जनता की सेवा के लिए या अपने व अपने परिवार व साथियों को :::::: भर पेट लिए यह सब होता, जबकि लोग यह भी कहते है कि सेवा करने के लिए जरूरी नही की राजनीति ही करे पैसा अगर बहुत है तो गरीबो व दिन दुखियों की सेवा करने के बहुत सारे रास्ते है, इसी तरह नारायण त्रिपाठी भी अपने आप को अपने तरीके से 20 वर्षों से मैहर की जनता की सेवा करते करते खुद की पार्टी के मालिक हो गए और इससे बड़ी उपलब्धि क्या होगी मैहर के लिए, वैसे तो लोग यही कहते है कि हर छोटी बड़ी पार्टियां जो बनी है तो गठन होते ही तुरंत उचाइयां नही छू लेती बहुत सारे संघर्षों से गुरते हुए पार्टी व दल को उचाइयां मिलती और कोई जब कमजोर पड़ जाता है तो पार्टी टूट भी जाती है अब अभी तो अब सुरु हुआ है नारायण त्रिपाठी की अग्नि परीक्षा, अभी तक तो बनी बनाई पार्टियों पर केवल चुनाव जीतने की टेंशन रहती थी अब तो जितने सीट पर प्रत्याशी खड़ा किये है उनकी भी टेंशन ? भाग 2 में