न्यायालय के साथ भी धोखाधड़ी से नहीं चूक रहे लोग

न्यायालय के साथ भी धोखाधड़ी से नहीं चूक रहे लोग

जनपद एटा में न्यायालय सिविल जज जूनियर डिवीजन ,जलेसर के साथ कपटपूर्वक अर्जित फर्जी साक्ष्यों का प्रयोग कर धोखाधड़ी किए जाने के मामले में न्यायालय ने दिए एफ आई आर दर्ज कर विवेचना के आदेश

रजनी देवी पत्नी रघुवीर निवासी ग्राम नगला धारू थाना कोतवाली अवागढ़ जिला एटा ने अपने साथियों के साथ मिलकर एक ही मेडिकल रिपोर्ट को किया था दो मुकदमों में प्रयोग

एक ही मेडिकल रिपोर्ट का दो मुकदमों में प्रयोग किया जाना धोखाधड़ी व अपराध की श्रेणी में आता है

न्यायालय सिविल जज जूनियर डिवीजन जलेसर में प्रार्थी सुनील कुमार उर्फ सोनू द्वारा के विद्वान अधिवक्ता श्री प्रशांत पुंढीर के द्वारा दिया गया और न्यायालय को अवगत कराया गया कि , थाना कोतवाली अवागढ़ के ग्राम नगला धारू निवासी हरेंद्र पुत्र पोखपाल ने धारा 307,504,506 आईपीसी तथा 3(2)एससी/एसटी एक्ट के अंतर्गत मु०अ०सं० – 264/2020 आरोपियों के विरुद्ध पंजीकृत कराया जिसमें रजनी देवी व रेशमा देवी के चिकित्सकीय परीक्षण की रिपोर्ट भी सम्मिलित थी।

एक ही मेडिकल रिपोर्ट का दो मामलों में प्रयोग

विद्वान अधिवक्ता श्री प्रशांत पुंढीर ने बताया कि रजनी देवी ने इस मुकदमे में दाखिल चिकित्सकीय परीक्षण की रिपोर्ट की छायाप्रतियों को छलपूर्वक प्राप्त कर लिया और उपरोक्त मुकदमे में प्रयुक्त इन्हीं चिकित्सकीय परीक्षणों की रिपोर्टों को आधार बनाकर और एक फर्जी घटना को दिखाकर ग्राम नगला धारू के तिलक सिंह , राजेंद्र सिंह , केशव रमेश पुत्रगण शिवचरन व सुनील पुत्र तिलकसिंह , राजा पुत्र केशव , अभिषेक पुत्र राजेंद्र को मुलजिम नामित कर प्रार्थना पत्र माननीय न्यायालय सिविल जज जूनियर डिवीजन जलेसर एटा के समक्ष प्रेषित किया।

पुराने चिकित्सकीय परीक्षण को माननीय न्यायालय में कपट पूर्वक फर्जी रूप से पुनः इस्तेमाल करते हुए धारा 1563 सीआरपीसी का प्रार्थना पत्र प्रेषित किया जो बतौर परिवार न्यायालय में दर्ज हुआ एवं स्वयं रजनी देवी रेशमा देवी व अन्य ने खुद को न्यायालय के समक्ष परीक्षित कराकर फर्जी मेडिकल रिपोर्ट की पुष्टि से शपथ न्यायालय के समक्ष की , इसके प्रभाव में आकर न्यायालय ने मुलजिम तिलक सिंह राजेंद्र सिंह केशव रमेश सुनील राजा व अभिषेक को अब धारा 452 , 323 , 504 , 506 आईपीसी में वास्ते विचारण तलब कर लिया।

प्रार्थी के विद्वान अधिवक्ता श्री प्रशांत पुंढीर ने समस्त तथ्यों को न्यायालय के समक्ष रखा एवं न्यायालय ने समस्त तथ्यों का परीक्षण कर यह जाना कि इस मुकदमे में पूर्व में अन्य मुकदमे में प्रयुक्त हुए मेडिकल परीक्षण की रिपोर्ट का दुरुपयोग किया गया है , जो न्यायालय के साथ धोखाधड़ी की श्रेणी में आता है और एक आपराधिक कृत्य है ।

न्यायालय ने थानाध्यक्ष अवागढ़ को आदेशित किया है कि वह प्रकरण में समुचित धाराओं में प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कर विवेचना किया जाना सुनिश्चित करें एवं अनुपालन आख्या में प्रथम सूचना रिपोर्ट साथ दिवस के भीतर न्यायालय में प्रस्तुत करना सुनिश्चित करें ।

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

यह खबर /लेख मेरे ( निशाकांत शर्मा ) द्वारा प्रकाशित किया गया है इस खबर के सम्बंधित किसी भी वाद - विवाद के लिए में खुद जिम्मेदार होंगा

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