
घोटालों की जांच से तिलमिलाए सीएमओ और डॉ0रंजीत सिंह।*
*दोनों मिलकर करा सकते हैं पत्रकारों की हत्या।*
*आये दिन मिल रही पत्रकारों को धमकियां।*
*मा0मुख्यमंत्री और मा0उपमुख्यमंत्री द्वारा दिए गए हैं जांच के निर्देश।*
एटा-जनपद में तैनात सीएमओ उमेश कुमार त्रिपाठी और अलीगंज सीएचसी पर तैनात रहे डॉ रंजीत सिंह द्वारा किए गए घोटालों की जांच से सम्बंधित जानकारियां स्थानीय पत्रकारों द्वारा मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री को दी गई थी। जिसकी जांच मा0मुख्यमंत्री जी एवं उप मुख्यमंत्री के निर्देश पर मंडल के उच्चाधिकारियों द्वारा पैनल बनाकर की जा रही है।प्रदेश के ओजस्वी मुख्यमंत्री द्वारा सन्दर्भ स012143230188953 के द्वारा जांच हेतु महानिदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य कल्याण विभाग को भेजी गई।वही उप मुख्यमंत्री मा0केशव प्रसाद मौर्य द्वारा पत्रांक स0UP-17-0526/04-10-२023 के द्वारा प्रमुख सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य कल्याण विभाग को भेजी गई।शिकायत में स्पष्ट किया गया है, कि एटा के सीएमओ उमेश कुमार त्रिपाठी ने जनपद में लाखों रुपए का घोटाला किया है, जिसमें कंटीजेंसी से लेकर अन्य सामान की खरीददारी अपने पुत्र दुष्यंत त्रिपाठी की फर्म से और अपने चहेतों की फर्मो से एक ही जगह आगरा से की गई है,जो कि मानक के अनुरूप नहीं हैं।दूसरी तरफ अलीगंज सीएचसी पर 2010-2011 में अधीक्षक के पद पर तैनात रहे डॉ0रंजीत सिंह द्वारा 52 लाख का गबन किया गया था,जिसकी जानकारी सरकार को होने के उपरांत कैग द्वारा की गई थी।जिसमें गबन की पुष्टि हुई थी,और उसकी रिकवरी भी भेजी गई थी।इन्हीं जांचों से तिलमिलाए सीएमओ उमेश त्रिपाठी और डॉ0रंजीत सिंह लगातार पत्रकारों को झूँठा फसाने और किसी भी अंजाम को भुगतने के लिए प्रत्क्षय व अप्रत्यक्ष रूप से अपने दबंग प्रवर्ति के लोगों से धमकियां दिलवा रहे हैं।चूंकि डॉ रंजीत सिंह अलीगंज में ही पैदा हुए और यहीं पढ़े लिखे तो यहाँ के सजातीय दबंग व्यक्तियों से उनके अच्छा तालमेल है, साथ ही वर्तमान सीएमओ उमेश त्रिपाठी भी जनपद के ही अमापुर हॉस्पीटल में वर्षों इंचार्ज रहे हैं, अपने कारनामों की बजह से ये हमेसा चर्चा में रहते हैं।लाखों रुपए के घोटालों जांच से तिलमिलाए दोनो अधिकारी सीएमओ एटा और डॉ0रंजीत सिंह किसी दिन घोटालों की जांच कराने वाले पत्रकार आशीष तिवारी, देवेंद्र शर्मा, मोहित यादव की हत्या तक करा सकते हैं।अतः प्रदेश के ओजस्वी मुख्यमंत्री योगी जी से पत्रकारों का निवेदन है, कि ऐसे भ्रष्ट अधिकारियों का स्थानांतरण यहाँ से कराकर पत्रकारों की जानमाल की रक्षा करने के साथ साथ निष्पक्ष जांच हेतु जांच अधिकारियों को पुनः निर्देशित करें।अन्यथा की दृष्टि में पत्रकारों को मुख्यमंत्री जी के समक्ष पुनः उपस्थित होकर अपनी व्यथा सुनानी होगी।