
#Etah….
डिप्टी सीएम का पुत्र बनकर किया प्रभारी मंत्री को फर्जी कॉल
◾लखनऊ क्राइम ब्रांच की टीम ने तीन लोगों को किया गिरफ्तार
◾जांच हेतु लखनऊ साथ ले गयी क्राइम ब्रांच टीम
◾जल्द हो सकता है स्वास्थ्य विभाग में बड़े फर्जीवाड़ा का खुलासा
◾पूंछताछ जारी, कइयों के नाम खुल सकते हैं
◾फर्जी नॉकरी दिलाने बाले बड़े रैकेट का हो सकता है पर्दाफास
◾निवर्तमान सीएमओ भी आ सकते है जांच के घेरे में
◾मामले की रिपोर्ट लखनऊ में दर्ज कराई गई है
◾मामला दर्ज होने के बाद लखनऊ क्राइम ब्रांच पुलिस हुई एक्टिव
◾पिछले 2 दिन से डाले हुई थी एटा में डेरा, मंगलवार शाम कार्रवाई की
मंगलबार को एटा में लखनऊ क्राइम ब्रांच की टीम की बड़ी कार्रवाही से हड़कम्प मच गया हैं। डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के पुत्र के नाम से फर्जी कॉल करके सीएमओ कार्यालय में संविदा पर नौकरी देने के लिए प्रभारी मंत्री को कॉल किया गया था। इसकी जांच की गई तो फर्जी कॉल करने वाले तीन लोगों के नाम सामने आए हैं। लखनऊ क्राइम ब्रांच की टीम ने एटा पहुंचकर मंगलवार को तीनों को उठा लिया। साथ ही टीम उन्हें अपने साथ लखनऊ ले गई है।
पुलिस के अनुसार मुख्य चिकित्साधिकारी एटा कार्यालय में संविदा पर नौकरी लगवाने के लिए डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के पुत्र योगेश मौर्य के नाम से प्रभारी मंत्री अतुल गर्ग को फोन किया गया था। फोन पर कहा गया कि एटा में नौकरी लग जानी चाहिए। साथ ही चेतावनी दी गई हर हाल में इस व्यक्ति को एटा के सीएमओ कार्यालय में नौकरी चाहिए। प्रभारी मंत्री को शक हुआ तो उन्होंने लखनऊ क्राइम ब्रांच टीम को कॉल की जांच करने के निर्देश दिए। इसमें एटा के तीन लोगों के नाम सामने आए। टीम ने मंगलवार को एटा पहुंचकर राजेश कुमार गुप्ता, राहुल कुमार और सीएमओ कार्यालय में तैनात एक संविदाकर्मी को उठा लिया। पुलिस की ओर से तीनों से पूछताछ की गई इसके बाद टीम उन्हें अपने साथ लखनऊ ले गई। एसएसपी सुनील कुमार सिंह ने बताया है कि लखनऊ की क्राइम ब्रांच टीम आई थी। जांच के बाद तीनों आरोपियों को पकड़कर ले गई है।
क्राइम ब्रांच पुलिस की बड़ी कार्रवाही से स्वास्थ्य विभाग में बड़े फर्जीवाड़ा का खुलासा हो सकता है। गिरफ्तार किए गए आरोपियों से पुलिस की पूंछताछ जारी। जिसमे कइयों के नाम खुल सकते हैं। पुलिस के अनुसार स्वास्थ्य विभाग में फर्जी नॉकरी दिलाने बाले बड़े रैकेट के पर्दाफास हो सकता है। जिसमें निवर्तमान सीएमओ के साथ कई विभाग के अधिकारियों और बाबू सकते जांच के घेरे में आ सकते हैं।