*खेतों में पराली जलेगी नहीं, उपयोगी बनेगी, रिपोर्ट योगेश मुदगल

कासगंज, । खेतों से निकलने वाली पराली को उपयोगी बनाकर प्रयोग करने को लेकर प्रशासन में कसरत शुरू कर दी गई है। पराली जलाने वालों पर भी प्रशासन सख्ती से निपटेगा। कार्यवाही करेगी। सोमवार को डीएम ने संबंधित अधिकारियों को पराली के संबंध में जिम्मेदारी सौंपी।
डीएम हर्षिता माथुर ने फसल अवशेष प्रवंधन बैठक में किसानों के साथ इस मामले में मंथन किया। कृषि विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं एवं कार्यक्रमों के बारे में बताया गया। डीएम ने जनपद स्तर पर जागरूकता अभियान, न्याय पंचायत स्तर पर जागरूकता अभियान, परमानेन्ट होर्डिग तहसील व विकास खण्ड स्तर पर करने के निर्देश दिये।
ये कमेटी करेगी मॉनीटिरिंगएडीएम (वित्त राजस्व) की अध्यक्षता में सेल का गठन किया जाएगा।यह सेल फसल की कटाई से रबी की बुबाई तक आवश्यकता मानीटरिंग की कार्यवाही सुनिश्चित करेगी। सभी एसडीएम, वीडीओ, थाना प्रभारी की देखरेख में सचल दस्ते का गठन किया जाएगा। लेखपाल निगरानी रखेंगे।
यह कार्य होंगे
● फसल अवशेष का कम्पोस्ट बनाने के लिए कृषकों को बायो वेस्ट डिकम्पोजर का शीघ्र ही निशुल्क वितरण होगा।
● प्रचार वाहन पराली प्रभावित क्षेत्रों में, धान की कटाई के समय कम्बाइन हार्बेस्टर मशीन में सुपर स्ट्रा मैनेजमेन्ट सिस्टम लगाया जाएं।
● कटाई के बाद फसल अवशेष प्रबन्धन के कृषि यंत्रों का प्रयोग में किया जाये।
● फसल को अन्य कार्यों जैसे पशु चारा, कम्पोस्ट खाद बनाया जाएगा।
● बायों कोल आदि में उपयोग के लिए कृषकों को प्रेरित किया जाये।
● पराली एकत्र कर निराश्रित गौशालाओं में लाने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
● पराली जलाने पर अर्थदंड का प्राविधान