
ऋषि विद्या केंद्र द्वारा अयोयोजित हो रही जनकल्याण चिकित्सा थेरेपी
मिर्जापुर
रागात्मक मंत्र चिकित्सा ऋषि विद्या केंद्र वाराणसी। ऋषि विद्या केंद्र नेवादा, नसीरपुर (विजडम एवेन्यू ) वाराणसी के अंतर्गत वर्षों से संचालित हो रही रागात्मक मंत्र चिकित्सा के द्वारा अब तक हजारों की संख्या में लोग स्वस्थ हो चुके हैं। संस्था के प्रमुख तंत्र योगी एवं इनलाइटेंड मास्टर श्री शंभू शरण घोष (गुरुजी) ने बताया कि 99% मानसिक एवं शारीरिक रोगों का कारण हमारा अवचेतन मन है और इसी के कारण विभिन्न प्रकार के वायरल, बैक्टीरिया, लिवर, फेफड़ा, हृदय किडनी, पेट, न्यूरल, मनोरोग एवं अन्य मानोदैहिक बीमारियां इत्यादि होते हैं जिसकी गहरी जड़े हमारे अवचेतन की गहाई के कारण शरीर में स्थित है। ज्ञातव्य है कि रागात्मक मंत्र चिकित्सा भारत के प्राचीन विज्ञान पर आधारित है जिसे गुरुदेव द्वारा पुनः जीवित किया गया है। यह चिकित्सा पद्धति अवचेतन मन के शुद्धिकरण करके मनुष्य को आरोग्यता प्रदान करती है। रागात्मक मंत्र चिकित्सा की सबसे बड़ी विशेषता आदरणीय गुरु जी ने यह बताया कि इसमें किसी भी प्रकार के मानसिक एवं शारीरिक रोगों के उपचार हेतु किसी भी प्रकार के ऑपरेशन, इंजेक्शन, सर्जरी एवं मेडिसिन की कोई भी आवश्यकता नहीं होती है। रागात्मक मंत्र चिकित्सा बिना सर्जरी एवं बिना मेडिसिन के सफलतापूर्वक रोगों का इलाज करने वाली एक प्राचीन विज्ञान की पद्धति है। और अब तक हजारों की संख्या में इस प्राचीन विज्ञान की पद्धत से लोग ठीक हो चुके हैं। इस संदर्भ में अनेक रोगियों की केस स्टडी को ऋषि विद्या केंद्र के आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर देखा जा सकता है। रागात्मक मंत्र चिकित्सा कार्य कैसे करती है? इसके उत्तर में श्री शंभू शरण घोष (गुरु जी) ने बताया कि जो- जो इस ब्रह्मांड में है वही- वही हमारे इस शरीर में भी है। यह ब्रह्मांड ओंकार की ध्वनि ऊर्जा से बना है जिसे आधुनिक विज्ञान इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन एवं न्यूट्रॉन कहता है ठीक वैसे ही हमारा सूक्ष्म शरीर भी इसी ओंकार की ध्वनि ऊर्जा bसे बना है। दूसरी बात कोई भी मानसिक एवं शारीरिक रोग तभी होता है जब इस सूक्ष्म शरीर का पूर्ण सामंजस्य ब्रह्मांड से टूट जाता है।यह मंत्र चिकित्सा हमारे सूक्ष्म शरीर एवं इस ब्रह्मांड के बीच पुनः सामंजस्य को स्थापित करता है। जो आरोग्यता प्राप्त करने में अति महत्वपूर्ण भूमिका अदा निभाता है। चिकित्सा के दौरान कुछ विशिष्ट प्रकार की मंत्र एवं ध्वनियां जो सूक्ष्म शरीर यानी अवचेतन मन में प्रवेश कराया जाता हैं तथा समस्त नाडियो एवं चक्र को ओंकार की ऊर्जा द्वारा शुद्धिकरण किया जाता हैं। इस प्रकार पूरे सूक्ष्म शरीर का पुनः नवीनीकरण एवं शुद्धिकरण हो जाता है परिणाम स्वरूप हमारे गहरे अवचेतन मन में स्थित समस्त मानसिक एवं शारीरिक रोगों की जड़े खत्म हो जाती हैं। और हमारा बाहरी शरीर बिना मेडिसिन बिना, बिना सर्जरी एवं बिना ऑपरेशन के पूर्णता स्वस्थ हो जाता है। गुरु जी ने बताया कि रागात्मक मंत्र चिकित्सा न केवल मानसिक एवं शारीरिक रोगों का सफलता पूर्वक इलाज करती है बल्कि यह जेनेटिक एवं आनुवंशिक रोगों का भी सफलतापूर्वक इलाज करती है। अतः ऋषि विद्या केंद्र आप सभी से निवेदन करता है कि अंग्रेजी एवं एलोपैथिक मेडिसिन का कम से कम प्रयोग करें ताकि उसके साइड इफेक्ट से बचा जा सके। अतः रागात्मक मंत्र चिकित्सा को अपनाए एवं समस्त शारीरिक, मानसिक, आध्यात्मिक, सामाजिक एवं आर्थिक लाभों को अर्जित करें। अंत में आदरणीय गुरु जी की ओर से ऋषि विद्या केंद्र आप सभी के आरोग्यता पूर्ण जीवन का अभिनंदन, वंदन एवं स्वागत करता है।