
शहीदों की चिताओं पर लगेंगे हर बरस मेले, वतन पर मरने वालों के यहीं बांकी निशां होंगे
एटा, । ‘शहीदों की चिताओं पर लगेंगे हर बरस मेले, वतन पर मरने वालों के यहीं बांकी निशां होंगे।’ देश की सीमा पर पाकिस्तान के साथ हुए कारगिल युद्ध में जनपद के दो वीरों ने अपनी कुर्बानी दी थी। कारगिल विजय दिवस पर जनपदवासियों ने उनकी शहादत को याद किया।
वर्ष 1999-2000 में हुए कारगिल युद्ध में जनपद के कठिंगरा निवासी पांचवीं महार रेजीमेंट के कैप्टन सुनील कुमार यादव और घिलऊआ के 13 कुमाऊं रेजीमेंट के जवान पुष्पेंद्र कुमार ने शहादत दी थी। कारगिल युद्ध में इन दो वीरों की शहादत को एटा आज भी याद कर नमन करता है। पूर्व सैनिक गंगा सिंह आर्य ने बताया कि कारगिल शहीद घिलऊआ निवासी पुष्पेंद्र के परिवार में उनके माता-पिता थे। उनका निधन हो चुका है। कठिंगरा के शहीद हुए सुनील कुमार यादव का भी विवाह नहीं हुआ था। इनके परिवार में माता शकुंतला देवी और पिता रामसिंह यादव वर्तमान में आगरा में रह रहे हैं। आज भी इनकी शहादत को गांव वाले याद करते हैं।
देश पर मर-मिटने वाले शहीदों की एटा में नहीं है कमी देश की सीमा पर जान की बाजी लगाने वाले शहीदों की लंबी फेहरिस्त है। वर्ष 1962 की इंडो-चाइना की लड़ाई में ब्लॉक निधौलीकलां रसूलगढ़ के रामस्वरूप व ब्लॉक सकीट के पीपल गांव निवासी ज्वाला सिंह ने शहादत दी थी। वर्ष 1971 में इंडो-पाक युद्ध में सबसे अधिक छह जवानों ने देश पर प्राण न्यौछाबर किए थे। उसमें श्यौवीर सिंह, करमसिंह, गंगा सिंह, राजकिशोर, मुंशीलाल, रामप्रसाद ने शहादत दी थी।
जनपद के तीन जवानों को मिले शौर्य चक्र जनपद के तीन शहीदों को शौर्य चक्र से नवाजा जा चुका है। उनमें इशारा पूंठ के वीरेंद्र सिंह, जसकरनपुर सानी निवासी रामसिंह, ढटिंगरा निवासी जसकरन सिंह शामिल हैं।