मणिपुर की उन औरतों के लिए बोलिए….अकरम खान

मणिपुर की उन औरतों के लिए बोलिए….अकरम खान

भारत के दर्शको और पाठको,

मुमकिन है आपमें से बहुतों ने मणिपुर का वह वीडियो नहीं देखा होगा, जिसमें बहुत सारे मर्द कुछ महिलाओं को नंगा कर उसके अंगों को दबोच रहे हैं। मर्दों की भीड़ निर्वस्त्र कर दी गईं औरतों को पकड़ कर ले जा रही है। भीड़ के कातिल हाथ उन औरतों के जिस्म से खेल रहे हैं। बेबस औरतें रोती जा रही हैं। मर्दों की भीड़ आनंद ले रही हैं। शालीनता के सामुदायिक नियमों के तहत सोशल मीडिया के साइट्स जल्दी ही इस वीडियो को रोक देंगे, लेकिन जो घटना है वो तो वास्तविक है। उसका ब्यौरा तो यही है जो लिखा है। हम जो नहीं जानते वह यह कि इस वीडियो के बाद उन औरतों के साथ क्या हुआ होगा? भीड़ उन्हें कहां से लेकर आ रही थी, कहां लेकर जा रही थी। उस वीडियो में आरंभ और अंत नहीं है, थोड़ा सा हिस्सा है, वह देखा नहीं गया लेकिन कोई भी उस वीडियो से मुंह नहीं मोड़ सकता है। आज आप चुप नहीं रह सकते हैं।

मर्दों की भीड़ से घिरी उन निर्वस्त्र औरतों के लिए आज बोलना होगा। आप जहां भी हैं, बोलिए। बाज़ार गए हैं तो वहां दुकानदार से बोलिए। रिक्शावाले से बोलिए। ओला-उबर के चालकों से बोलिए। पिता को फोन किया है तो उन्हें सबसे पहले यही बताइये। प्रेमिका का फ़ोन आया है तो सबसे पहले यही बताइये। क्लास रुम में हैं तो वहां खड़े होकर अपने टीचर के सामने बोलिए, किसी रेस्त्रां में दोस्तों के साथ मस्ती कर रहे हैं तो वहां खाना रोककर इन औरतों के लिए बोलिए। बस में हैं, ट्रेन में हैं, एयरपोर्ट पर हैं तो वहां बोलिए कि मणिपुर से एक ऐसा वीडियो वायरल हुआ है, जिसमें भीड़ औरतों को नंगा कर उनके जिस्म से खेल रही है। यह घटना उस उस देश में हुई है, जो हर दिन यह झूठ दोहराता है कि यहां नारी की पूजा देवी की तरह होती है। फिर अपनी ही गाड़ी के पीछे बेटी बचाओ लिखवाता है ।अगर आज आप उस भीड़ के खिलाफ नहीं बोलेंगे तो उनका शरीर, उनका मन हमेशा हमेशा के लिए निर्वस्त्र हो जाएगा।आपका नहीं बोलना, उसी भीड़ में शामिल करता है। उसी भीड़ की तरह आपको हैवान बनाता है, जो उन औरतों को नंगा कर उनके जिस्म से खेल रही है। इसलिए फोन उठाइये, बोलिए,लिखिए और सबको बताइये कि मणिपुर की औरतों के साथ ऐसा हुआ है।हम इसका विरोध करते हैं। हमारा सर शर्म से झुकता है। आप अपनी मनुष्यता बचा लीजिए। मणिपुर की घटना के खिलाफ बोलिए। कोई नहीं सुन रहा है तो अकेले बंद कमरे में उन औरतों के लिए रो लीजिए।

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

यह खबर /लेख मेरे ( निशाकांत शर्मा ) द्वारा प्रकाशित किया गया है इस खबर के सम्बंधित किसी भी वाद - विवाद के लिए में खुद जिम्मेदार होंगा

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