संगठन यात्रा
अभी भी बहुत कुछ बांकी है अपने आत्म परिचय और वीरेश के लिए

फोटो मुलाकात वीरेश के परिजन के साथ
दरयाव गंज । 2004में जून की तारीख 27की घटना को आज हम लोग
पुण्य तिथि के रूप में 19साल से मनाते आ रहे हैं । जिस साल ये घटना हुई थी जिसमें शराब के तस्करों ने वीरेश गुप्ता को चक्रव्यूह में घेर कर मार डाला था । और एक जुलाई तक मामला थाने में विचाराधीन ही था । तब एटा जिला था । मंडल आगरा था । मैं मंडल अध्यक्ष था । दरयाव गंज जा पंहुचा था । जो ग्रामीण पत्रकार एसोसियेशन के जिलाध्यक्ष रामनरेश चौहान ने बताया और मौका दिखा पर थाना पुलिस पर कार्रवाई में शिथिलता बरतने का आरोप लगाया । फिर जो संघर्ष छिना लखनऊ तक जा पंहुचा। शासन से दो एकड़ जमीन का पट्टा,।कुल आठ लाख रुपया आदि आदि के साथ आरोपी गिरफ्तार होने शुरू हो चुके थे । इसके बाद हम वीरेश को अपने तरह से याद बनाने में और वीरेश का परिवार न्याय की गुहार में तथा वीरेश की कच्ची गृहस्थी को संभालने में लग गए । छोटे भाई राजू पुत्र शशि और वीरेश की पत्नी अपनी तीन पुत्रियों को जीवन के पथ पर बढ़ चले । बड़ी लड़की की शादी और शशि को स्थापित करने में परिवार लगा । राशन की सरकारी दुकान का संचालन के बल पर आगे बढ़े ।
मगर 19वीं पुण्य तिथि पर जब वीरेश के परिवार से विगत दिवस मेरी और संगठन मंत्री नरेश सक्सेना से मुलाकात हुई तो
लगा हमारी हालत नो दिन चले अढ़ाई कोश की हालत में थे ।
हमने भले ही उनके पट्टे वाली जमीन को स्मारक फार्म के रूप में उसकी चारदीवारी में पुस्कालय बनवाने का प्रस्ताव रखा हो मगर वीरेश के परिजन अभी भी अपने प्रति हुए अन्याय को लेकर द्रवित थे।
उन्होंने बताया संगठन के प्रयास से हमें राहत और सहायता तो मिल गई मगर न्याय के मामले में हमारे अपने जो प्रयास थे पुलिस और शराब तस्करों के आगे कमजोर पड़ गए । पुलिस ने मामला हत्या का लिखा मगर चार्जशीट सड़क दुर्घटना की लगा और गिरफ्तार आरोपी को छोड़ हमें भ्रमित कर मामला ही बदल वीरेश की जो हत्या हुई थी के न्याय की लड़ाई में संगठन को हरा दिया ।
वीरेश के परिजनों ने कहा कि
वे उक्त हत्या की जांच चाहते हैं । जिसके लिए वे किसी भी अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़े तैयार हैं ।
मुलाकात में जिलाध्यक्ष रामनरेश चौहान भी थे । सुन कर हम सभी दंग रह गए ।
प्रदेश के अध्यक्ष सौरभ कुमार जी भी कोषाध्यक्ष व एक अन्य पदाधिकारी के साथ विगत वर्ष भी आए थे । प्रदेश उपाध्यक्ष होने के नाते मेने कहा कि वीरेश के भाई और पत्नी को न्याय के लिए संगठन की ओर सेआपके प्रत्येक कदम के साथ होने का आश्वासन देता हूं ।
एक कलम के धनी की हत्या को साधारण रूप से सड़क हादसा बताकर मामले को दाखिल दफ्तर करदेना और वास्तविकता से परे करने के कुचक्र को करने वालों के खिलाफ फिर से संघर्ष करने के लिए मजबूर कर गया है ये दोहरा जीवन।
वीरेश के भाई राजू से 15जुलाई तक सभी प्रपत्रों के साथ मिलने को कहा है जिससे विधिक जानकारी ले कर संघर्ष समिति बना लड़ाई लड़ी जा सके ।
इस समय कासगंज के जिलाध्यक्ष संजीब बाबी, अलीगढ़ के मंडल अध्यक्ष चौहान और प्रदेश संगठन मंत्री सक्सेना भी दरयाव गंज में मौजूद थे । समय था पुण्य तिथि का ।
दूसरी तरफ आयोजित गोष्ठी में पत्रकारिता के लिए ग्रा प ए कार्यशाला भी चलाए का प्रस्ताव भी यहां गोष्ठी में मेरी ओर से लाया गया । जिसकी जरूरत इस लिए है कि हम तभी सुरक्षित पत्रकारिता कर सकते हैं जब हम पहले जानकारी और संवाद का ख्याल रखेंगे । खबर लिखते या दिखाते समय वर्जन का ख्याल रखें मिल सिद्धांत का ध्यान रखेंगे यह तभी संभव होगा । आओ जय ग्रा पा ए बोल अपने आत्म सम्मान के लिए इस सिद्धांत को प्रतिपादित करें ।