जिले में प्राइवेट अस्पताल एवं नर्सिंग होम्स की भरमार

जिले में प्राइवेट अस्पताल एवं नर्सिंग होम्स की भरमार
एटा: जिले के गली-मोहल्लों एवं कस्बों में प्राइवेट अस्पताल एवं नर्सिंग होम्स धड़ल्ले से चल रहे हैं जिनमें बड़ी संख्या में ऐसे अस्पताल एवं नर्सिंग होम्स हैं जिनका स्वास्थ्य विभाग में रजिस्ट्रेशन भी नहीं हैं लेकिन स्वास्थ्य विभाग की कृपादृष्टि बराबर बनी रहती हैं, अपने निजी स्वार्थों और अधिक कमाई के चक्कर में स्वास्थ्य विभाग जिले की जनता को मौत के मुंह में धकेल रहा है।

प्राईवेट नर्सिंग होम्स एवं अस्पतालों में हो रही मौतों पर थोड़ी देर का शोर फिर शांति
कल शहर के चर्चित क्लिनिक सन्मति सेवा धाम नर्सिंग होम पर डॉ रुपा जैन की लापरवाही से प्रसूता की हुई मौत हो गई, परिजनों ने काफी बवाल काटा तो पुलिस ने मौके पर पहुंचकर मामला शांत करा दिया।
इसके अलावा जिलेभर में बड़ी संख्या में अवैध क्लिनिक भी संचालित है जिनपर आयेदिन जच्चा-बच्चा की मौत की खबरें आती रहती हैं, लेकिन इन अवैध क्लिनिकों पर दिखावे की कार्यवाही तभी होती है जब वहां जच्चा-बच्चा की मौत हो और मामला मीडिया में उछल जाए।

मौतों पर जनप्रतिनिधियों ने भी बंद कर रखी हैं आंखें
अवैध क्लिनिकों पर हो रही मौतों पर जनता द्वारा चुने जनप्रतिनिधियों ने भी आंखें बंद कर रखी हैं यह कहना ग़लत नहीं होगा कि आयेदिन अवैध नर्सिंग होम्स पर हो रही मौतों के लिए जितना जिम्मेदार उस नर्सिंग होम का संचालक और उसका पोषक स्वास्थ्य विभाग है उतना ही जिम्मेदार जनप्रतिनिधि भी हैं क्योंकि उनका मौन समर्थन भी ऐसे लोगों को भरपूर मिल रहा है।

जिलेभर में जिन अवैध नर्सिंग होम एवं अस्पतालों पर कई बार स्वास्थ्य विभाग ने की कार्यवाही वो आज भी नाम बदलकर खुलेआम चल रहे हैं, जनपद में अवैध नर्सिंग होम के कुछ संचालकों का ऐसा दबदबा है कि कई बार कार्यवाही होने के बाद भी धड़ल्ले से संचालित रहते हैं जिन्हें कहीं न कहीं नेताओं का समर्थन भी मिला हुआ है।

जनपद के किसी भी मुख्य मार्ग पर पड़ने वाले गांव कस्बों में छोलाछाप डाॅक्टर दुकानें खोलकर बैठे हैं और लोगों के जान-माल के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं इनपर स्वास्थ्य विभाग अभियान चलाकर कार्यवाही करना नहीं चाहता, ऐसे छोलाछाप दुकान खोलकर बैठे डाॅक्टर पर स्वास्थ्य विभाग की नजर जब ही पड़ती है जब वो किसी को मौत के घाट उतार दे, कुल मिलाकर स्वास्थ्य विभाग ने कार्यवाही करने के लिए अपना नियम बना लिया है कि जब घटना घटे तभी क्लिनिक सीज करने की कार्यवाही की जाए उससे पहले किसी और की दुकान और अपनी तिजोरी पर ताला न डाला जाए।

About The Author

निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

यह खबर /लेख मेरे ( निशाकांत शर्मा ) द्वारा प्रकाशित किया गया है इस खबर के सम्बंधित किसी भी वाद - विवाद के लिए में खुद जिम्मेदार होंगा

Learn More →

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

अपडेट खबर के लिए इनेबल करें OK No thanks