पुलिसवालों का भोपाल में यह इकलौता बैंक, जहां मैनेजर रहता वर्दीवाला

*जवाज पुलिस मध्य प्रदेश में  को-ऑपरेटिव क्रेडिट सोसायटी लिमिटेड: पुलिसवालों का भोपाल में यह इकलौता बैंक, जहां मैनेजर रहता वर्दीवाला*

राजधानी में पुलिसवालों का एक ऐसा भी ‘बैंक’ है, जहां मैनेजर भी वर्दी वाले होते हैं। जी हां! मप्र पुलिस को-ऑपरेटिव क्रेडिट सोसायटी लिमिटेड नाम से ये संस्था 1999 से संचालित की जा रही है। भदभदा रोड स्थित 25वीं बटालियन में संचालित ये एक वित्तीय संस्था है, जिसमें 5000 पुलिसवाले ही सदस्य हैं। बैंकों की तर्ज पर ही यहां से अपने सदस्यों को जरूरत के मुताबिक लोन भी दिया जाता है और उनकी रकम की आरडी-एफडी भी की जाती है। खास बात ये है कि नॉन प्रॉफिट ऑर्गेनाइजेशन के रूप में काम कर रही इस संस्था ने वित्तीय वर्ष में 2.24 करोड़ रुपए का लाभ अर्जित किया है, जो रिकॉर्ड है।
इसे सहकारी अधिनियम के तहत वर्ष 1999 में पुलिसकर्मियों को फायदा देने के उद्देश्य से रजिस्टर्ड करवाया गया था। 25वीं बटालियन के मौजूदा कमांडेंट इस संस्था के अध्यक्ष होते हैं। कमांडेंट निश्चल झारिया ने बताया इस संस्था में सिपाही से लेकर डीजीपी तक करीब 5000 सदस्य हैं। इनमें एसएएफ, पीएचक्यू, जिला पुलिस बल, सीआईडी, एसटीएफ, एटीएस, लोकायुक्त, ईओडब्ल्यू, जीआरपी, पुलिस रेडियो और सायबर शाखा के अधिकारी-कर्मचारी शामिल हैं।
*वेलफेयर में भी करते हैं खर्च*
हर साल के मुनाफे में से कुछ हिस्सा पुलिसकर्मियों के वेलफेयर में भी खर्च किया जाता है। इस संस्था में काम करने वाला कुछ स्टाफ पुलिसकर्मियों के परिवार के ही सदस्य हैं, जो बेरोजगार थे। इन्हें मानदेय दिया जाता है और ये मानदेय उसी मुनाफे में से दिया जाता है।
*इस संस्था ने 2.24 करोड़ का मुनाफा कमाया*
इस वित्तीय संस्था में मैनेजर भी वर्दीवाले होते हैं। इन दिनों ये जिम्मेदारी सूबेदार विजय राठौर के पास है। विजय ने बताया इस वित्तीय वर्ष में इस संस्था ने 2.24 करोड़ रुपए का मुनाफा कमाया है। इससे पहले इस संस्था ने कभी इतना मुनाफा नहीं कमाया। संस्था के हर सदस्य को अधिकतम 25 हजार रुपए का शेयर लेने का अधिकार है। हर पुलिसकर्मी के शेयर के आधार पर उन्हें मुनाफे की रकम का हिस्सा बांट दिया जाएगा। हम यहां से अपने सदस्यों को हाउसिंग लोन, पर्सनल लोन, एजुकेशन लोन, कार लोन और टू व्हीलर लोन भी देते हैं। उन्होंने बताया यदि इस संस्था के किसी सदस्य का निधन हो जाता है तो उसके परिवार को संस्था की ओर से 21 हजार रु. दिए जाते हैं। ऐसे ही सदस्यों के बच्चे यदि 10वीं-12वीं में 85% अंकों के साथ पास होते हैं तो उन्हें भी 5100 रुपए दिए जाते हैं। मप्र पुलिस की ऐसी 20 संस्थाएं इंदौर, सागर, रीवा, गुना में भी संचालित हो रही हैं।

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

यह खबर /लेख मेरे ( निशाकांत शर्मा ) द्वारा प्रकाशित किया गया है इस खबर के सम्बंधित किसी भी वाद - विवाद के लिए में खुद जिम्मेदार होंगा

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