भ्रांतियों से बनाएं दूरी जांच और सही इलाज ही संजीवनी

भ्रांतियों से बनाएं दूरी जांच और सही इलाज ही संजीवनी।

इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल्स और एसोसिएशन ऑफ फिजिशियन ऑफ इंडिया की प्रेस कॉन्फ्रेंस में विशेषज्ञोंने दी जानकारी।

विशेषज्ञों ने हृदय संबंधी विकार और आंतों से जुड़ी बीमारियों के इलाज के बारे में नई तकनीकों की जानकारी दी।

वाराणसी देश के अलग अलग हिस्सों में लोगों को बेहतर उपचार प्रदान करने के लिए अपोलो की पहल जारी है। इसी पहल के तहत नई दिल्ली ​स्थित इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल ने एसोसिएशन ऑफ फिजिशियन ऑफ इंडिया के साथ मिलकर उत्तर प्रदेश के वाराणसी शहर में प्रेस कान्फ्रेंस आयोजित की जिसमें चिकित्सा और मीडिया क्षेत्र के लोगों को हृदय संबंधी विकारों और आंतों से जुड़ी बीमारियों के इलाज के बारे में विशेषज्ञों ने अहम जानकारियां साझा कीं।
कार्यक्रम का नेतृत्व अपोलो ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स के समूह सलाहकार और इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी, पेरिफेरल वैस्कुलर एंड एंडोवस्कुलर इंटरवेंशन विभाग के वरिष्ठ सलाहकार डॉ (प्रो) एनएन खन्ना और इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल के गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी विभाग के वरिष्ठ सलाहकार डॉ. योगेश बत्रा ने किया। इस दौरान हृदय संबंधी विकारों और आंतों में सूजन सहित अन्य संबं​धित बीमारियों के उपचार को बढ़ावा देने के लिए संकेतों और लक्षण के अलावा नैदानिक ​​परीक्षणों पर चर्चा की। विशेषज्ञों ने बताया कि बीते एक साल में दिल्ली के इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल में हृदय संबंधी विकारों और सूजन आंत्र रोग को लेकर कुछ चुनौतीपूर्ण मरीजों का इलाज हुआ है।
अपोलो ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स के समूह सलाहकार और इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी, पेरिफेरल वैस्कुलर एंड एंडोवस्कुलर इंटरवेंशन विभाग के वरिष्ठ सलाहकार डॉ (प्रो) एनएन खन्ना ने कहा, “जब हम हृदय संबंधी विकारों पर चर्चा करते हैं तो हम जानते हैं कि लोग स्वस्थ नहीं हैं। आजकल सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों के जरिए हार्ट अटैक की घटनाएं सुनने और देखने को मिल रही हैं। इसे लेकर लोगों में भय अ​धिक है और इलाज के बारे में भी बहुत सारी भ्रांतियां भी हैं। जबकि वास्तविकता यह है कि बतौर डॉक्टर हमने हृदय संबंधी विकारों के प्रबंधन में प्रमुख प्रगति देखी है। अगर मरीज भ्रांतियों पर भरोसा करता है इससे उसके जीवन को ही खतरा हो सकता है। इस तरह के जागरूकता कार्यक्रमों के जरिए इन्हीं भ्रांतियों को दूर करना मुख्य उद्देश्य है। इसके अतिरिक्त, इस बीमारी के लिए उपलब्ध निवारक उपायों के बारे में समुदाय को सूचित किया जाना भी जरूरी है।”
वहीं इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल के गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी विभाग के वरिष्ठ सलाहकार डॉ. योगेश बत्रा ने कहा, “इस तथ्य के बावजूद कि भारत में इंफ्लेमेटरी बाउल रोग यानी सूजन आंत्र रोग का प्रसार तेजी से बढ़ रहा है, बड़े पैमाने पर मरीजों को आ​खिरी स्टेज तक बीमारी का पता नहीं चल पाता है। इसे लेकर न सिर्फ आम जनता ब​ल्कि डॉक्टरों के बीच भी जागरूकता लाना बहुत जरूरी है। अक्सर बीमारी की पहचान को लेकर आशंका रहती है जिसका नुकसान मरीज के जीवन पर पड़ता है। इन मरीजों के इलाज के लिए चिकित्सा बुनियादी ढांचे की कमी के साथ-साथ दवा की खराब उपलब्धता भी इलाज में अवरोध पैदा करती है। इस सम्मेलन का उद्देश्य आम जनता के बीच सूजन आंत्र रोग की प्रस्तुति के बारे में जागरूकता पैदा करने के अलावा इलाज करने वाले डॉक्टरों को रोग प्रबंधन और उपलब्ध उपचार के तौर-तरीकों के बारे में संवेदनशील बनाना है।

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

यह खबर /लेख मेरे ( निशाकांत शर्मा ) द्वारा प्रकाशित किया गया है इस खबर के सम्बंधित किसी भी वाद - विवाद के लिए में खुद जिम्मेदार होंगा

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