कुछ समझ पाता तब तक पूरा परिसर गोलियों की आवाज से गूंजने लगी

मैं कुछ समझ पाता तब तक पूरा परिसर गोलियों की आवाज से गूंजने लगी

लखनऊ, विधि संवाददाता। बुधवार दोपहर लगभग 345 बजे का वक्त रहा होगा। मैं एक मुकदमे की सुनवाई के लिए पुराने हाईकोर्ट परिसर में अपने जूनियर के साथ गया था। अपने केस की फाइल देखी और एससी-एसटी कोर्ट के बाहर से अपने सहयोगी के साथ सिविल कोर्ट जा रहा था। एससी-एसटी कोर्ट के गेट से एक युवक पुलिस अभिरक्षा में बाहर निकला। मैं करीब 10 कदम दूर था कि कोर्ट के बगल स्थित सीढ़ियों की ओर से एक युवक निकला और ताबड़तोड़ गोलियां चलाने लगा।

हाथों में पिस्टल लिए बेखौफ चला रहा था गोलियां मैं कुछ समझ पाता तब तक पूरा परिसर गोलियों की आवाज से गूंजने लगा। जिसे गोली लगी थी, वह कोर्ट की ओर भागा। हाथ में पिस्टल लिए एक युवक बेखौफ गोलियां दागता हुआ पीछा कर रहा था। गोली लगने के कारण नौजवान गिर गया था। मंजर देख मैं भी बदहवास सा गेट की ओर भागा। अपने सहयोगी से भी तुरंत निकलने को कहा। चारों तरफ अफरातफरी और भगदड़ मच गई थी। पेशी के लिए आए पुलिसवाले भी भागने लगे। गोलियां चलाने वाले युवक को बाद में तो मैंने नहीं देखा लेकिन कुछ वकील साथियों ने एक संदिग्ध को दबोचा और पीटना शुरू कर दिया।
‘इतनी दुस्सासहिक घटना पहली बार देखी’
मैंने अपने वकालत के पेशे में ऐसी दुस्सासहिक घटना पहली बार देखी थी। गोली चलाने वाले युवक के चेहरे पर कोई शिकन नहीं थी। बस वह सिर्फ अपने टारगेट का जैसे पीछा कर रहा हो। घटना इतनी भयावह थी कि लोग अपनी जान बचाने के लिए कोर्ट परिसर में इधर-उधर भाग रहे थे। किसी की गोदी में बच्चा था तो कोई अपने वृद्ध परिजन के साथ आया था। घटना के बाद जब स्थिति सामान्य हुई तो पता चला कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसी अपराधी संजीव उर्फ जीवा को गोली मारी गई है।

(जैसा सिविल कोर्ट के वरिष्ठ

अधिवक्ता आरके यादव ने बताया)

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

यह खबर /लेख मेरे ( निशाकांत शर्मा ) द्वारा प्रकाशित किया गया है इस खबर के सम्बंधित किसी भी वाद - विवाद के लिए में खुद जिम्मेदार होंगा

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