जिला समाज कल्याण अधिकारी नहीं जानतीं पीएफ के मायने, रिपोर्ट योगेश मुदगल

- आरटीआई आवेदकों को घुमाने में हासिल है महारथ !
- देना नहीं चाहतीं विभाग में लगे वाहनों से संबंधित सूचना!
- वित्तीय सूचना के सवाल पर भी दिया टालू मिक्चर!
- 17 मई को जारी किया पत्र 26 मई को कराया पोस्ट!
एटा। क्या ऐसा हो सकता है कि राजकीय सेवाओं से जुड़ा कोई व्यक्ति, कर्मचारी या अधिकारी पीएफ का तात्पर्य ना जानता हो ? शायद जबाब होगा नहीं ! लेकिन जनपद एटा में एक ऐसी राजपत्रित अधिकारी हैं जिन्हें पीएफ यानी की प्रोविडेंट फंड/ भविष्य निधि का तात्पर्य ही नहीं मालूम! इस बात का खुलासा एक आरटीआई के माध्यम से हुआ है। पीएफ का तात्पर्य ना समझने वाली राजपत्रित अधिकारी कोई और नहीं बल्कि एटा में जिला समाज कल्याण अधिकारी के पद पर तैनात श्रीमती रश्मि यादव जी हैं। इतना ही नहीं एक आरटीआई आवेदक द्वारा उनसे वित्तीय वर्ष 2022-2023 का शासन से प्राप्त धन और खर्च के व्यौरे की प्रमाणित प्रति चाही गई तो उन्होंने आवेदक को प्रमाणित प्रति उपलब्ध ना कराकर कार्यालय में आकर अवलोकन करने की बात कही है। आखिर उन्हें बजट के खर्च के व्यौरे की प्रमाणित प्रति उपलब्ध कराने में क्या आपत्ति है यह तो वह स्वयं ही जानती होंगी। इसके साथ ही जिला समाज कल्याण अधिकारी श्रीमती रश्मि यादव ने उस सवाल पर भी टालू मिक्चर दिया है जिसमें उनके कार्यालय के वाहनों से संबंधित कुछ जानकारियां चाही गई हैं। विचारणीय बिन्दु तो ये है कि जब आवेदक सूचना की प्रमाणित प्रतियां चाह रहा है तो फिर उक्त अधिकारी कार्यालय में आकर पेपर अवलोकन कराने की बात आखिर क्यों कर रही हैं ? इतना ही नहीं कार्यालय में तैनात उर्दू अनुवादक के शैक्षिक योग्यता के प्रमाणपत्र पे सिल्प आदि देने से भी एक धारा का सहारा लेकर इनकार कर दिया है। कई अन्य सवालों पर उन्होंने व्यक्तिगत सूचना बताकर बचने की कोशिश की है। जबकि आरटीआई की धारा 11 के अनुसार सूचना अधिकारी किसी तृतीय पक्षकार द्वारा दी गई एवं गोपनीय समझी जाने वाली सूचना को प्रकट करने के आशय की सूचना अनुरोध प्राप्ति के पांच दिन की भीतर तृतीय पक्षकार को देकर प्रकट करने के लिए सशक्त है। ऐसे में उर्दू अनुवादक जखीर अहमद के संबंध में सूचना उपलब्ध ना कराना या जखीर अहमद से सूचना प्राप्त ना करना उनकी कार्यशैली पर प्रश्नचिन्ह लगाता है। आवेदक द्वारा चाही गई कोई भी सूचना ऐसी नहीं है जो धारा 8 (1) का उल्लंघन करती हो। जिला समाज कल्याण अधिकारी श्रीमती रश्मि यादव शासन की मंशा के अनुरूप पारदर्शिता से कार्य नहीं कर पा रही हैं। इसकी एक बानगी यह है कि जो पत्र उन्होंने 17 मई को जारी किया उसे पूरे एक सप्ताह बाद 26 मई को अरूणानगर पोस्ट ऑफिस से पोस्ट कराया जो कि आवेदक को 27 मई को मिला है। जिला समाज कल्याण अधिकारी आरटीआई आवेदकों को घुमाने में महारथ हासिल किये हुए हैं। उनकी यह कारगुजारी माननीय संसद द्वारा प्रदत्त सूचना अधिकारी अधिनियम 2005 का खुला उल्लंघन कर रही है। उच्चाधिकारियों को ऐसे लापरवाह अधिकारियों के प्रति कठोर कार्यवाही करनी चाहिए।