
रामभद्राचार्य की ब्राह्मणों पर टिप्पणी से उबाल
जगदगुरु की भाषा व शब्दावली संतों व आचार्यों की नहीं
कासगंज, । जगदगुरु रामभद्राचार्य के सोशल नेटवर्क पर अधम ब्राह्मणों के संबंध में वायरल एक वीडियो पर तीर्थ नगरी सोरों के पुरोहितों में तीखी प्रतिक्रिया हुई है। लोगों में उबाल है। आक्रोशित पुरोहितों व ब्राह्मणों ने जगदगुरु के इस वीडियो की तीखी निंदा की है।
सोरों के ब्राह्मणों ने कहा कि रामभद्राचार्य खबरों में बने रहने के लिए विवादित टिप्पणियां करते रहते हैं। उनकी बात को अधिक महत्व नहीं दिया जाना चाहिए। रामभद्राचार्य के द्वारा रामचरित मानस के रचियता गोस्वामी तुलसीदास की जन्मभूमि चित्रकूट व सूकरक्षेत्र के चित्रकूट में होने के बयानों पर भी सोरों के लोगों ने काफी आक्रोश रहा है। अद्यम ब्राह्मणों की टिप्पणी के संबंध में ब्राह्मणों ने कहा कि वह साक्ष्यों व तर्कों के आधार पर कोई बात नहीं कहते हैं। उनके द्वारा बोली गई शब्दावली भी संतों की नहीं होती है।
रामभद्राचार्य ने बहुत ही अशिष्ट शब्दावली का प्रयोग किया है। सभी प्रकार के व्राह्मण पर ऐसी टिप्पणी बेहद निंदनीय है। किस वेद में किस अर्ण में किस सूत्र किस शाखा में यह वर्णित कि इस इस गोत्र के व्राह्मण अधम हैं। उन्होंने खुद कहा है कि वह कथा कहने के लिए धनराशि लेते हैं।
-पंडित उमेश पाठक
रामभद्राचार्य महाराज द्वारा कहे गए शब्द आचार्य और संतों की शब्दावली नहीं है। यह शब्दावली ब्राह्मणों से द्वेष रखने वालों की है, मुझे दुख है कि वह अपने आप को ब्राह्मण भी बताते हैं। मुझे शंका होती है, क्या वह सत्य में भी ब्राह्मण है भी या नहीं। यह भाषा कतई नहीं हो सकती है।
-पंडित हेमंत त्रिगुणायत
रामभद्राचार्य जी का स्वभाव ही कुछ ऐसा है कि वे हर अविवादित तथ्य को भी विवादित बना देते हैं। पौराणिक तीर्थस्थल सूकरक्षेत्र भागीरथी गंगा के तट पर स्थित है, उन्होंने उसे कामदगिरि को गुफा में बता दिया। तुलसीदास जी का जन्म सोरों में हुआ, उन्होंने उसे राजापुर में बता दिया।
आचार्य राहुल वशिष्ठ
जगदगुरु रामभद्राचार्य खबरों में बने रहने के लिए विवादित टिप्पणियां करते रहते हैं। साक्ष्य व तर्कों के आधार पर वह कुछ नहीं कहते हैं। हनुमान चालीसा में त्रुटि, गोस्वामी तुलसीदास के जन्मस्थान व सूकरक्षेत्र की स्थिति के बारे में वह गलत बयानी करते रहे हैं। टिप्पणी की हम कड़ी निंदा करते हैं।
भूपेश शर्मा