जहाँ चार यार मिल जाए,वहां रात हो गुलजार

जहाँ चार यार मिल जाए,वहां रात हो गुलजार, रिपोर्ट योगेश मुदगल

कासगंज, । शहर में वाटर कूलर लगे हुए थे। अधिकारियों ने देखभाल से आंखें फेर लीं। मशीनें जंग खाने लगीं। प्यासे लोग इधर-उधर भटकने लगे। लाखों रुपया बेकार जा चुका था। चार दोस्तों ने लोगों की प्यास बुझाने के लिए सेवा को हाथ बढ़ाए। वे एक-एक कर एक दर्जन वाटर कूलर ठीक कराते गए। गर्मी में शीतल जल मिलने पर हर कोई चार युवा मित्रों की सराहना कर रहा है।

चार दोस्त अमित कावरा, अचिंत गर्ग, हिमांशु अग्रवाल, संदीप माहेश्वरी अलग-अलग व्यावसायिक क्षेत्रों में अपना काम करते हैं । इनकी हेल्प कासगंज संस्था है। आपके अपने हिन्दुस्तान अखबार में खराब वाटर कूलरों की खबरें छप रहीं थीं। उन्हें प्रकाशित खबरों से पता चला तो खराब वाटर कूलरों को ठीक कराने को आगे आए। उन्होंने मैकेनिकों की एक टीम लगाई और अपने निजी खर्चे से वाटर कूलरों को ठीक कराना शुरू कर दिया। अब तक एक दर्जन वाटर कूलरों को ठीक करा चुके हैं। इन्हें ठीक कराने में हजारों रुपये भी खर्च हुआ, लेकिन उन्हें इस बात का संतोष है कि, गर्मी में लोगों को शीतल जल पीने को मिल रहा है।

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

यह खबर /लेख मेरे ( निशाकांत शर्मा ) द्वारा प्रकाशित किया गया है इस खबर के सम्बंधित किसी भी वाद - विवाद के लिए में खुद जिम्मेदार होंगा

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