
एटा-
90प्रतिशत वंचित है अपने अधिकारों से शहर और पब्लिक—
क्या हम और हमारा शहर अपने अधिकारों से संतुष्ट है उखड़ी सड़कें उड़ती धूल में सांसें लेना मुस्किल हो रहा है हम पढ़े लिखे इंसान क्या आजकी प्रोग्रेस बाले संसाधनों में रह रहे हैं न उच्च शिक्षा न कोई मनोरंजन रोटियां कमाने के चक्कर में परदेश में परिवार और अपनों से दूर जाता आदमी अपराधीकरण का मुख्य कारण किसी भी उद्योग का न होना आजकी भागम भाग जिंदगी में कुछ पलों के लिए अपने बच्चों परिवार के साथ कोई पर्यटक स्थल ऐसा नहीं है जहां लोकल सुबह से शाम तक मनोरंजन कर सके ऐसा भी नहीं कि यहां कोई ऐतिहासिक चीजें नहीं है लेकिन उनकी परवरिश और उन पर किसी भी प्रकार का कोई फोकस तो नहीं डाला गया उसे उजड़ते देख इग्नोर किया गया अच्छी खासी ऐतिहासिक चीजें खंडहर हो गई लेकिन शासन-प्रशासन या पब्लिक की तरफ से किसी भी तरह की कोई अलर्ट नेस देखने को नहीं मिली छोटे से शहर में चार चार सिनेमा हॉल थे लेकिन आज एक भी नहीं है यह शहर है या कस्बा गांव लेकिन कुछ भी है जिला स्तरीय कुछ भी नहीं है आज की प्रोग्रेस से 90प्रतिशत वंचित है ये शहर अपने वोट का इस्तेमाल वही करें जहां इसका सदुपयोग हो धन्यवाद।
दीप्ति,✍️