हर हाल में चुनाव जीत करा चुका , अब जीत का अंतर बढ़ाने में जुटे, रिपोर्ट योगेश मुदगल

एटा, । नगर निकाय चुनाव में हर प्रत्याशी जातीय समीकरण बैठाकर खुद को जीता हुआ प्रत्याशी मान रहा है। दलीय प्रत्याशियों के साथ निर्दलीय प्रत्याशियों को अपना गणित है। गणित भी ऐसा है कि सामने वाला जोड़ते समय यहीं कहकर जाता है कि हां अब आप चुनाव जीत गए। इस समय चुनाव प्रचार दिन रात चल रहा है।
एटा नगर पालिका में एक लाख 11 हजार है। चुनाव मैदान में आठ प्रत्याशी है। इसमें चार प्रमुख दलों के प्रत्याशी है। चार निर्दलीय प्रत्याशी है। दलीय प्रत्याशी अपना पार्टी के बेस वोट पर जीत सुनिश्चित मान रहा है। जबकि निर्दलीय प्रत्याशी अपने कार्य व्यवहार और जातिगत आंकड़ों के हिसाब से चुनाव में जीत दर्ज करा रहा है। खासबात यह है कि कोई भी अपना वोट बीस से 25 हजार से नीचे नहीं गिन रहा है। वह हर हाल में चुनाव जीत करा चुका है। अब जीत का अंतर बढ़ाने में जुटे हुए है। इस चुनाव में खास बात यह है कि मुद्दा कोई नहीं दिख रहा है। शहर के लिए क्या क्या कराना है। किस बात से लोग परेशान हैं। उसको लेकर कोई बात नहीं कर रहा है। पूरा चुनाव जातिगत आंकड़ों पर चलता हुआ नजर आ रहा है। वर्ष 2017 में निकाय चुनाव में 62 फीसदी ही मतदान रहा था। पहले चरण के लिए हुए मतदान में जो आसपास के जनपदों का मतदान हुआ है उससे लग रहा है कि कम वोटर निकलकर आ रहा है। इसके बाबजूद भी सभी प्रत्याशी खुद को 20 से 25 हजार से ऊपर लड़ता हुआ बता रहे हैं। जबकि शहर में कुल मतों की संख्या एक लाख 11 हजार 11 ही है।