श्रीमद् भागवत कथा का छठा दिन- रुक्मणी मंगल कथा भगवान के साथ सच्ची प्रीत से ही ज्ञान प्रकट होता है:

रीवा कथा व्यास आचार्य देवेन्द्र उपाध्याय योगी जी महाराज
श्री भगवान द्वारा वरुण लोक से नंद बाबा को छुड़ाकर लाना श्री सुखदेव जी द्वारा रासलीला का वर्णन श्री कृष्ण के विरह में गोपियों की दशा गोपी गीत श्री भगवान द्वारा प्रकट होकर गोपियों को सांत्वना देना महाराज का वर्णन सुदर्शन शंखचूड़ का उद्धार युगल गीत अरिष्ठा सर उधार के सी का उद्धार श्री अक्रूर जी की ब्रज यात्रा श्री कृष्ण बलराम का मथुरा गमन कुब्जा प्रसंग धनुष भंग श्री भगवान का अखाड़े में प्रवेश चार और मुस्कान शादी का उद्धार श्री कृष्ण बलराम का यज्ञोपवीत एवं गुरुकुल प्रवेश उद्धव जी की ब्रज यात्रा उद्धव गोपी संवाद भ्रमरगीत उद्धव जी का मथुरा लौटना भगवान का कुब्जा बाबूजी के घर जाना जरासंध से युद्ध द्वारकापुरी का निर्माण कालयवन का उद्धार श्री कृष्ण के पास रुक्मणी का संदेश लेकर ब्राह्मण का आना रुक्मणी हरण अमृतमयी वाणी में आयोजित सप्तदिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के छठवें दिवस को योगी जी महाराज ने कहा कि सर्वेश्वर भगवान श्रीकृष्ण ने ब्रज में अनेकानेक बाल लीलाएं कीं, जो वात्सल्य भाव के उपासकों के चित्त को अनायास ही आकर्षित करती है. जो भक्तों के पापों का हरण कर लेते हैं, वही हरि है. महारास शरीर नहीं अपितु आत्मा का विषय है. जब हम प्रभु को अपना सर्वस्व सौंप देते हैं तो जीवन में रास घटित होता है. महारास में भगवान श्रीकृष्ण ने बांसुरी बजाकर गोपियों का आह्वान किया लेकिन जब गोपियों की भांति भक्ति के प्रति अहंकार आ जाता है तो प्रभु ओझल हो जाते है. उसके पश्चात गोपियों ने एक गीत गया जिसे “गोपी गीत” कहा जाता है.
उसके माध्यम से उनके ह्रदय की पीड़ा को देखकर भगवान कृष्ण प्रकट हो गए और रास घटित हुआ. महारास लीला के द्वारा ही जीवात्मा परमात्मा का ही मिलन हुआ. जीव और ब्रह्म के मिलने को ही महारास कहते है. उन्होंने कहा कि महारास में पांच अध्याय है. उनमें गाये जाने वाले पंच गीत भागवत के पंच प्राण हैं ,जो भी ठाकुरजी के इन पांच गीतों को भाव से गाता है ,वह भव पार हो जाता है. उन्हें वृंदावन की भक्ति सहज प्राप्त हो जाती है.
कथा व्यास योगी जी महाराज के साथ आए हुए आचार्य ब्राह्मण बंधु गणों ने सराहनीय सहयोग किया आचार्य कुलदीप जी आचार्य विपिन उपाध्याय पंडित प्रवीण मिश्रा पंडित यश दुबे संगीतकार आर्गन में श्रवण शुक्ला जी तबले में रोहित पांडे जी पैड में धर्मेंद्र,मुख्य यजमान प्रकाश चंद्र मिश्रा,धर्मपत्नी श्रीमती उत्तरा मिश्रा, देवी शंकर मिश्रा, श्री प्यारेलाल द्विवेदी, राजेश मिश्रा, बृजेश तिवारी,तेज मणि तिवारी, रमाशंकर द्विवेदी, जैनेंद्र द्विवेदी, बाल्मिक द्विवेदी, रजनीश शुक्ला, सरपंच बृजवासी यादव आदि श्रोता गण उपस्थित रहे,