गल्ला मंडी में 3600 कुंतल, क्रय केंद्रों पर 100 कुंतल ही आ रहा गेहूं

गल्ला मंडी में 3600 कुंतल, क्रय केंद्रों पर 100 कुंतल ही आ रहा गेहूं, रिपोर्ट योगेश मुदगल

एटा, । सरकारी गेहूं क्रय केंद्र से अधिक रेट पर इस बार मंडी में किसानों का गेहूं उत्पादन खरीदा जा रहा है। उसके चलते मंडी में पिछले वर्ष की अपेक्षा गेहूं की बंपर खरीद हो रही है। गल्ला मंडी में पिछले वर्ष की अपेक्षा अब तक 40 हजार कुंतल तक अधिक गेहूं खरीद जा चुका है।

जिले की मुख्य खाद्यान्न मंडी में एक अप्रैल से 25 अप्रैल तक 2160 से 2200 रुपये प्रति कुंतल की दर से 90 हजार 772 कुंतल गेहूं की खरीद की जा चुकी। जबकि वर्ष गल्ला मंडी पिछले वर्ष एक से 25 अप्रैल तक 51 हजार 255 कुंतल गेहूं खरीदा गया था। बुधवार को नवीन खाद्यान्न मंडी सचिव कुमार एवं वरिष्ठ लिपिक अरविंद कुमार ने संयुक्त रूप से बताया कि इस बार मंडी का रेट सरकारी गेहूं केंद्रों पर शासन द्वारा निर्धारित रेट से अधिक बना हुआ है। इसके चलते मंडी में गेहूं की बंपर खरीद हो रही है। उन्होंने बताया कि अब तक अधिकांश बड़े किसानों ने गेहूं बेचना शुरू नहीं किया है। वह और अधिक गेहूं के रेट बढ़ने की प्रतीक्षा कर रहे है। अगर वह भी गेहूं बेचना प्रारंभ कर दे तो मंडी में गेहूं की आवक, पिछले वर्ष से 50 फीसदी से भी अधिक बढ़ सकती है।

26 दिन बाद भी 67 गेहूं क्रय केंद्रों पर नहीं खुला खरीद का खाता एटा। बुधवार को जिला खाद्य विपणन अधिकारी नंद किशोर ने बताया कि किसानों का उत्पादन सरकार द्वारा निर्धारित किए गए समर्थन मूल्य पर खरीदने के लिए जिले में कुल 83 गेहूं क्रय केंद्र बनाए गए है। इनमें से 16 क्रय केंद्रों पर ही एक से 26 अप्रैल तक कुल 2500 कुंतल गेहूं की खरीद हो सकी है। बाकी 67 केंद्रों पर गेहूं खरीद का खाता भी नहीं खुल सका है। उन्होंने बताया कि खाद्य विभाग के पांच, पीसीएफ के सात, पीसीयू के तीन, यूपीएसएस के एक कुल एक केंद्र पर ही गेहूं खरीद हो सकी है। जबकि इस बार जिले को 76 हजार मीट्रिक टन गेहूं खरीद का लक्ष्य प्राप्त हुआ है। उन्होंने यह भी बताया कि सरकार का मुख्य उद्देश्य है कि क्रय केंद्र हो या गल्ला मंडी किसान का गेहूं समर्थन मूल्य से कम नहीं खरीदा जाना चाहिए।
*क्रय केंद्र पर गेहूं बेचने के लिए करनी पड़ती है इतनी प्रक्रिया

एटा। सरकारी क्रय केंद्र पर गेहूं बेचने के लिए सबसे पहले किसान को पंजीकरण करना होता है। 100 कुंतल से नीचे गेहूं बेचने वाले किसानों दस्तावेज संबंधी सत्पयापन एडीएम के माध्यम से किया जाता है। 100 कुंतल से अधिक गेहूं बेचने वाले किसान के उत्पादन की मात्रा के अलावा जमीनी सत्यापन एसडीएम के माध्यम से किया जाता है। इसके बाद किसान केंद्र पर गेहूं बेचने पहुंचता है। केंद्र प्रभारी गेहूं तौलकर डिजिटल हस्ताक्षर से गेहूं की मात्रा लॉक करता है। उसके बाद जिला खाद्य विपणन अधिकारी एवं केंद्र जिला प्रबंधक किसान का भुगतान कराने के लिए आगे की प्रक्रिया करते है। उसके 24 या 72 घंटे बाद किसान के खाते में गेहूं का रुपया आता है।

मंडी में गेहूं बेचने पर नहीं कोई झमेला

एटा। गल्ला मंडी में गेहूं बेचने के लिए किसी प्रकार कोई पंजीकरण या सत्यापन नहीं करना पड़ता है। मंडी में किसान से उतराई, तुलाई, छनाई का भी कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं वसूला जाता है। उत्पादन बेचते ही किसान को नकद भुगतान मिल जाता है। जबकि सरकारी क्रय केंद्र पर गेहूं बेचने वाले किसान को उतराई, छनाई का भी 20 रुपये प्रति कुंतल के हिसाब से भुगतान करना पड़ता है। इस प्रकार किसान को 2105 रुपये प्रति कुंतल ही गेहूं का भुगतान हो पाता है।

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

यह खबर /लेख मेरे ( निशाकांत शर्मा ) द्वारा प्रकाशित किया गया है इस खबर के सम्बंधित किसी भी वाद - विवाद के लिए में खुद जिम्मेदार होंगा

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