टिकट को लेकर जो घमासान मे हारे,जीत भी टिकी है उन्ही के सहारे

वर्चस्व की जंग।कौन किसके संग।
टिकट को लेकर जो घमासान मे हारे,जीत भी टिकी है उन्ही के सहारे।
भाजपा प्रत्याशी के नामांकन मे नहीं दिखाई दिये शहर के कई वर्ग के धमकधारी नेता
एटा -नगरपालिका एवं नगर पंचायत के अध्यक्ष पद के चुनाव मे टिकट के लिये लम्बी खिची जद्दोजहद के बीच भाजपा ने सूची जारी कर अन्तिम दिन नामांकन करा दिया।निधौलीकलां, जलेसर,सकीट, सहित कई जगह टिकट ना मिलने से लोगों को मलाल हुआ।और मौन वृत पर चले गये।लेकिन एटा पर टिकट का घमासान वर्चस्व की जंग बन गया।इस वर्चस्व की जंग मे कौन किसके संग है।ये तो बाद मे पता चलेगा।लेकिन कलेक्ट्रेट पर नामांकन दाखिल करने आये नेताओं के साथ शहर के कई वर्ग के धमकधारी नेता नजर नहीं आये।कुछ नेताओं से बातचीत हुई जिसका नतीजा साफ था। वर्चस्व? इस वर्चस्व की जंग मे सत्ता की धमक भी अहम भूमिका मे है। कई वर्ग के धमकधारी नेताओं सेअलग अलग बात हुई तो उनके बोल भी सत्ता से भयभीत लग रहे थे।प्रखर विरोध का हौसला नजर नहीं आरहा था।और टीस(दर्द) इतना कि प्रत्याशी के समर्थन करने को मजबूरी भी नही बता रहे । बरहाल अध्यक्ष की जीत हो या हार परन्तु भाजपा के दिग्गजों का वर्चस्व जरूर हारेगा, जीतेगा ।अभी बैठकों का दौर रूठों को मनाने का शुरू हो चुका है।तो कुछो पर दवाव भी बनाने की रणनीति पर तेजी से विचार करने पर बल दिया जा रहा ।
पत्रकार जसवन्त सिंह यादव

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

यह खबर /लेख मेरे ( निशाकांत शर्मा ) द्वारा प्रकाशित किया गया है इस खबर के सम्बंधित किसी भी वाद - विवाद के लिए में खुद जिम्मेदार होंगा

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