
पुराने समय में जब कोई गाँव व नगर बसाया जाता था तो साथ गोवंश के लिए भी भूमि का प्रावधान होता था, जैसा कि आजकल स्कूल, बाजार क्लब, पार्क आदि का पर गोवंश के लिए कुछ नहीं । यहां तक गोचर भूमि देश कि आजादी के बाद सत्ताधारियों की गो-विरोधी नीतियों के कारण समाप्त प्रायः रह गई । गोचर भूमि न होने के कारण गोपालको को गाय पालना बङा मुश्किल है । गाय एक खूँटे से बन्धे रहने की बजाय स्वच्छन्द घुमकर चारा खाना पसंद करती है। गाय की गोचर भूमि पर हमने कब्जा करके उसे दर-दर भटकने को मजबूर कर दिया, फिर हम उसे अवारा कहकर दुत्कारते हैं । यह सब स्वतंत्रता के बाद से लेकर आजतक सत्ताधारियों की गो-विरोधी नीतियों का परिणाम है।