22 अप्रैल को पृथ्वी दिवस पर दिल्ली में पर्यावरण व समाजसेवा के क्षेत्र की प्रतिभाओं को सम्मानित किया जायेगा–ज्ञानेन्द्र रावत

आगामी 22 अप्रैल को पृथ्वी दिवस पर दिल्ली में पर्यावरण व समाजसेवा के क्षेत्र की प्रतिभाओं को सम्मानित किया जायेगा–ज्ञानेन्द्र रावत

आगामी 22 अप्रैल को पृथ्वी दिवस पर दिल्ली में हरिजन सेवक संघ के किंग्सवे कैंप स्थित सभागार में नव प्रभात जन सेवा संस्थान द्वारा आयोजित सम्मेलन में देश में पर्यावरण संरक्षण व समाज सेवा के क्षेत्र में अपना अमूल्य योगदान देने वाली प्रतिभाओं को प्रख्यात पर्यावरणविद श्री सुंदर लाल बहुगुणा एवं श्री अनुपम मिश्र तथा प्रख्यात समाजसेवी श्री बाबा आमटे स्मृति सम्मान से सम्मानित किया जायेगा। इस सम्मेलन के मुख्य अतिथि देश में जल संरक्षण में दशकों से अहम भूमिका निर्वहन करने वाले पद्मश्री से सम्मानित राजा लक्ष्मण सिंह जी व अध्यक्षता प्रख्यात गांधीवादी व हरिजन सेवक संघ के अध्यक्ष श्री शंकर कुमार जी सान्याल करेंगे।

इस अवसर पर नव प्रभात जन सेवा संस्थान जिन प्रतिभाओं को सम्मानित कर रहा है, उनके क्रियाकलापों के बारे में हम यहां सिलसिलेवार जानकारी दे रहे हैं। इस श्रृंखला में सर्वप्रथम प्रस्तुत है पर्यावरणविद श्री पुष्पेन्द्र सिंह और डा० जितेंद्र नागर जी के विषय में।
पुष्पेन्द्र कुमार सिंह ( पुष्पेन्द्र भाई), बांदा

उत्तर प्रदेश के बांदा जिलान्तर्गत पाण्डुई ग्राम निवासी ,पेशे से किसान और बुंदेलखंड में अपना तालाब योजना के तहत किसानों के सहयोग से तकरीबन 43 हजार से अधिक तालाब बनवाने वाले श्री पुष्पेन्द्र भाई किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। इनके अथक प्रयासों का परिणाम है कि बुंदेलखंड में जहां 2 से 3 मीटर भूजल स्तर में वृद्धि हुई है, जो प्रतिवर्ष औसतन एक से डेढ़ मीटर की दर से नीचे जा रहा था। सूखे कुंओं और ट्यूबवैलों में पानी में बढ़ोतरी हुई है। पेड़-पौधों की संख्या बढी़ है, लाखों एकड़ जमीन सिंचित हुई है। पशुपालन में सकारात्मक प्रभाव दिखाई दे रहा है, फसलों में विविधता दिखाई देती है, परिणामतः किसान की क्रय शक्ति में वृद्धि के साथ आजीविका में भी व्यापक बदलाव दिखाई पड़ रहा है। इनके कार्य से प्रभावित बेल्जियम के किसान जोहान डीहलस्टर ने अपने तालाब का नाम पुष्पेन्द्र भाई तालाब रखा है। यही नहीं न्यूयार्क की स्टेट यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर डा० राहुल रस्तोगी ने अपने शोध छात्रों के साथ इनकी अपना तालाब योजना का यहां आकर अध्ययन किया है। किसानी की विधा, आवर्तनशील खेती एवं फार्म डिजाइनिंग आपकी विशेषता है। अभी तक आप इटली में आयोजित तेरा मादरे सम्मेलन, महात्मा गांधी ग्रामोदय विश्वविद्यालय, चित्रकूट, भीमराव अंबेडकर विश्व विद्यालय, लखनऊ, राष्ट्रीय भूजल मंथन, नागपुर, महाराष्ट्र, केन्द्रीय जलशक्ति मंत्रालय ,भारत सरकार,उ०प्र० कृषि मंत्रालय ,कृषि निदेशालय उ०प्र०व हरियाणा सरकार द्वारा आयोजित राष्ट्रीय सेमिनार,महारानी लक्ष्मीबाई कृषि विश्व विद्यालय व भारतीय चारागाह अनुसंधान संस्थान झांसी आदि समूचे देश में सभा-सेमिनारों में पर्यावरणीय, जल, आजीविका, खाद्यान्न उपलब्धता व किसान से जुड़ी समस्याओं तथा उससे जुड़े संकट तथा खेती से संपूर्ण समाधान विषयक मामलों पर व्याख्यान देने वाले पुष्पेन्द्र भाई आज भी जल संरक्षण के कार्य में जी-जान से जुटे हुए हैं।
डा० जितेंद्र नागर, गाजियाबाद, उ०प्र०

भूगर्भ विज्ञानी एवं पर्यावरणीय मामलों के विधि विशेषज्ञ डा० जितेंद्र नागर दिल्ली विश्वविद्यालय के डा० बी आर अम्बेडकर कालेज में पर्यावरण विज्ञान विभाग में प्रोफेसर हैं। डा० नागर केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पूर्व अधिकारी के अलावा वर्तमान में देश के विश्वविद्यालयों के अधीन आने वाले कालेजों के पर्यावरण विज्ञान के प्रोफेसर्स के ख्यातनामा संगठन ” इनवायरमेंट एण्ड सोशल डवलपमेंट ऐसोसिएशन” यानी ईएसडीए के महासचिव हैं। तालाबों व नदियों के पुनर्जीवन हेतु बीते तकरीबन दो दशक से संघर्ष रत डा० नागर पर्यावरण के क्षेत्र में देश की राजधानी में अमेरिका, कनाडा, जर्मनी, जापान, इंडोनेशिया, मालदीव, बांग्लादेश, श्रीलंका, थाईलैंड, ब्रिटेन आदि दुनिया के देशों के प्रमुख पर्यावरण विज्ञानियों, पर्यावरणविदों एवं देश के पर्यावरण विशेषज्ञों का “वर्ल्ड इनवायरमेंट समिट” के नाम से सम्मेलन का आयोजन करते हैं। इसके अलावा ग्लोबल वाटर कान्फ्रेंस का अनूठा आयोजन जिसमें देश-विदेश के तकरीबन 450 से 600 पर्यावरण विज्ञान व जल संरक्षण के शोध छात्र सहभागिता करते हैं। इन आयोजनों की विशेषता यह है कि इनमें देश-दुनिया के पर्यावरण विज्ञानियों के अलावा देश के पर्यावरणविद,विश्व विद्यालय के कुलपति,एनजीटी के अध्यक्ष आदि की उपस्थिति महत्वपूर्ण होती है, वहीं विद्वानों द्वारा पर्यावरण की बिगड़ती दिशा और दशा पर व्यापक चर्चा से शोधार्थी लाभान्वित होते हैं।
पर्यावरण के क्षेत्र में डा० नागर अभी तक एस टी ई वाटर अवार्ड, पर्यावरण प्रहरी अवार्ड,बायोडायवर्सिटी कंजरवेशन अवार्ड,ग्रीन लीडरशिप अवार्ड,पर्यावरण रत्न पुरस्कार ,पर्यावरण भूषण सम्मान, डा० गोपाल पाण्डेय स्मृति पर्यावरण पुरस्कार व
सुंदर लाल बहुगुणा स्मृति सम्मान से सम्मानित हो चुके हैं। ऐसे पर्यावरण विज्ञानी डा० जितेन्द्र नागर आज भी पर्यावरण संरक्षण की मुहिम में जोर-शोर से लगे हुए हैं।

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

यह खबर /लेख मेरे ( निशाकांत शर्मा ) द्वारा प्रकाशित किया गया है इस खबर के सम्बंधित किसी भी वाद - विवाद के लिए में खुद जिम्मेदार होंगा

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