
सिरमौर सिंह भदौरिया नहीं रहे वो साइकिल पर विचार लेकर निकलते थे । और घर वापसी में आचार विचार के साथ ढेर सारी समालोचना समीक्षा और उक्तियां लेकर प्रवेश करते थे । कामरेड के सम्पूर्ण गुण उनके अंदर थे । उनका जाना भदावर कालेज के लिए बहुत बड़ी छती हैं । वे समय के चिंतक थे ।
मेरा उनको नमन । अंजना भारती और मधु को ईश्वर उनके पिता श्रीको गोलोक वासी होने का दुख सहने को ईश्वर हिम्मत दे ।