सिरमौर सिंह भदौरिया नहीं रहे

सिरमौर सिंह भदौरिया नहीं रहे वो साइकिल पर विचार लेकर निकलते थे । और घर वापसी में आचार विचार के साथ ढेर सारी समालोचना समीक्षा और उक्तियां लेकर प्रवेश करते थे । कामरेड के सम्पूर्ण गुण उनके अंदर थे । उनका जाना भदावर कालेज के लिए बहुत बड़ी छती हैं । वे समय के चिंतक थे ।
मेरा उनको नमन । अंजना भारती और मधु को ईश्वर उनके पिता श्रीको  गोलोक वासी होने का दुख सहने को ईश्वर हिम्मत दे ।

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

यह खबर /लेख मेरे ( निशाकांत शर्मा ) द्वारा प्रकाशित किया गया है इस खबर के सम्बंधित किसी भी वाद - विवाद के लिए में खुद जिम्मेदार होंगा

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