73 साल के बाद दर्ज किया जा सका 840 बीघा जमीन में घोटाले का मुकदमा, हेराफेरी कर जमीन बेच दी
पहले रेल राज्यमंत्री के पुत्र समेत दो पर केस, रिपोर्ट योगेश मुदगल

एटा, कार्यालय संवाददाता। देश के पहले रेल राज्यमंत्री रोहनलाल चतुर्वेदी के पुत्र मनोज चतुर्वेदी सहित दो लोगों पर जमीन घोटाले का मुकदमा दर्ज हुआ है। लेखपाल की ओर से दर्ज कराए गए मुकदमे करीब 70 हेक्टेयर से अधिक जमीन में हेराफेरी कर इस जमीन को बेच दिया।
तहसील सदर के लेखपाल राधेश्याम की ओर से कोतवाली नगर में दर्ज कराए मुकदमे कहा है कि सर्वोदय आश्रम ट्रस्ट के सर्वराकार रोहनलाल चतुर्वेदी के नाम वर्ष 1939 में 1189.28 एकड़ भूमि थी। वर्तमान में रोहनलाल चतुर्वेदी के पुत्र मनोज चतुर्वेदी के नाम 70.595 हेक्टेयर भूमि है। इसमें से काफी भूमि का विक्रय किया जा चुका है। डीएम अंकित कुमार अग्रवाल की ओर से तीन सदस्यीय गठन किया गया।
सर्वोदय आश्रम ट्रस्ट की भूमि की अभिलेखीय जांच तहसील एटा से करायी गयी। शेष गाटों में भूलेखीय स्थिति की जांच अभिलेखागार में उपलब्ध दस्तावेजों तथा तहसील में उपलब्ध अभिलेखों की जांच की गई। सर्वोदय आश्रम एटा के नाम वर्तमान खतौनी में बतौर संक्रमणिय भूमिधर अंकित है, जबकि 1347फसली में सभी गाटे बंजर की श्रेणी में अंकित है। इसके पश्चात इन गाटों पर कोई चकबन्दी नहीं हुई। इससे स्पष्ट है कि सन् फसली 1347 के अंकित गाटा संख्या में ही स्वामित्व का फेर बदल किया गया है। जांच कमेटी को मिला कि 19 फरवरी1951 को निस्पादित एक डीड की छायाप्रति संलग्न मिली।
इस डीड में रोहनलाल पुत्र ज्वालाप्रसाद की ओर से उक्त सारणी के सभी गाटो को डीड के माध्यम ट्रस्ट सर्वोदय आश्रम को दे दिया गया है। इससे स्पष्ट है कि प्रथम पृष्ठ में ही भूमि को बंजर मानते हुए 60 एकड़ भूमि ट्रस्ट को दी गयी। बंजर में अंकित थी तो रोहनलाल चतुर्वेदी को किस प्रकार इस भूमि का ट्रस्ट में अन्तरण का अधिकार प्राप्त हुआ। इसका उपलब्ध अभिलेखों में कोई आदेश अंकित नहीं है। कूंचा में बिक्री की गई जमीन भी अवैधएटा। नॉन जेडए गाटा संख्या 1035 में रोहनलाल चतुर्वेदी के वारिस के तौर पर मनोज चतुर्वेदी की ओर से भूमि के जो मोहल्ला तिवारियान चतुर्वेदी कम्पाउण्ड, पटियाली गेट एटा में स्थित है के बैनामा किये गये। इसमें न्यायालय की ओर से स्टॉम्प कमी की जांच तहसील को अग्रसारित की गयी।
एटा शहर में आबादी के तौर पर दर्ज है तथा नॉन जेडए भूमि के रूप मे दर्ज है। अत इस भूमि का बैनामा विधि विरूद्ध है।
पहले रेल राज्यमंत्री के पुत्र समेत दो पर केस
नरेंद्र और मनोज चतुर्वेदी पर ये है आरेाप
एटा। मनोज चतुर्वेदी तथा उनके दिव्यंगत पिता की ओर से एटा में स्थित उपरोक्त भूमियों जोकि गांवसभा/बंजर की थी। अवैध कब्जा कर कृषि कार्य कर रहे थे। अपने अधिकृत मंत्री नरेन्द्र देव उपाध्याय पुत्र बहोरीलाल उपाध्याय निवासी सुनहरी नगर की ओर से उक्त सरकारी भूमि का बैनामा करवाया।
इस अपराध में मनोज चतुर्वेदी व नरेन्द्र देव उपाध्याय पूर्णत दोषी है। उक्त सरकारी भूमि पर अवैध क्रय-विक्रय करने के सम्बन्ध में को नोटिस दिया गया। नोटिस के पश्चात् तथा न्यायालय एएसडीएम के आदेशोंपरान्त भी उक्त व्यक्तियों की ओर सरकारी भूमि से अपना अवैध अध्यासन नहीं हटाया गया। विक्रय पत्रों में विक्रेता सर्वोदय आश्रम एटा की ओर अधिकृत प्रतिनिधि एवं मन्त्री नरेन्द्र देव उपाध्याय की ओर सम्पत्ति का अंतरण किया गया है।
नरेन्द्र देव उपाध्याय को ट्रस्ट का अधिकृत प्रतिनिधि/मन्त्री नियुक्त किये जाने सम्बन्धी कोई पुष्ट अभिलेख प्रस्तुत नहीं किया गया है। विक्रय पत्रों के साथ जो तथाकथित प्राधिकार पत्र उपलब्ध है, वह स्वयं नरेन्द्र देव उपाध्याय की ओर से जारी 20 मार्च 2023 संस्था सर्वोदय आश्रम के प्रबन्ध समिति की बैठक की कार्रवाई प्रबन्धकारिणी समिति की सत्य प्रतिलिपि है। यह मामला धारा 420, 447, 465, 467, 468, 471, 120बी, 34 एवं सार्वजनकि सम्पत्ति नुकशान अधिनियम की धारा दो, तीन के तहत कोतवाली नगर थाने में अभियोग पंजीकृत कराया है।
सर्वोदय आश्रम के नाम वर्ष 1951 में विधिवत पंजीकृत विलेख द्धारा भूमि का अंतरण किया गया था। जमीदार विनाश अधिनियम 1952 से प्रभावी हुआ है। उससे पूर्व जमींदारों को भू अंतरण का पूर्ण अधिकार था। अभियोग तथ्यों को तोड मरोडकर गलत धारणा से लिखाया गया है। न्यायालय में चुनौती देंगे। खाता संख्या 1033 में मेरी निजी आबादी की भूमि में से बैनामा किए गए है। हमारी पैतृक आवास की भूमि इस पर 200 वर्षों से मेरे पूर्वज आवास बनाकर रह रहे थे वह सार्वजनिक भूमि कैसे हो सकती है।