जीवंत स्मृतियाँ सृजन संभव करती है – अवधेश सिंह विधायक पिंडरा

जीवंत स्मृतियाँ सृजन संभव करती है – अवधेश सिंह विधायक पिंडरा।

जीवंत स्मृतियां सृजन संभव करती हैं। विद्यापीठ के हिंदी विभाग का मैं विद्यार्थी रहा छात्रसंघ अध्यक्ष बना अध्यापन किया विभागाध्यक्ष बना और अब जनसेवा कर रहा हूँ पिंडरा विधायक हूँ। उक्त बातें प्रोफेसर अवधेश सिंह ने कही वह हिंदी विभाग के पुरा छात्र सम्मेलन सप्तसिंधु को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने आगे कहा उनके निर्माण में हिंदी विभाग की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने उपस्थित पुरा छात्र छात्राओं से कहा जिस बगिया के फूल हैं, उसकी खुशबू का विस्तार करें।
विभागाध्यक्ष प्रो. निरंजन सहाय ने कहा कि पुरा छात्र सम्मेलन अनेक कारणों के चलते विलक्षण है। इस सम्मेलन में जो गणमान्य अतिथि आए हैं, उन्होंने अपनी दृष्टि के द्वारा विभाग को संपन्न करने का काम पहले भी किया है और आगे भी वे विभाग को संपन्न करते रहेंगे। किसी भी विभाग की ख्याति उसमें काम करने वाले अध्यापक/अध्यापिकायों से नहीं बल्कि वहाँ के विद्यार्थियों से होती है और यही विद्यार्थी बाहर की दुनिया में जाते हैं और विभाग का विस्तार करते हैं। यहाँ पर आए हुए पुरा छात्रों ने जिस तरह से विभाग के यश और कीर्ति का विस्तार किया है, वह अनेक दृष्टि से उल्लेखनीय है। हम सच में खुद को गौरवान्वित महसूस करते हैं कि विभाग ने ऐसे शानदार विद्यार्थियों की पूरी परंपरा से खुद को संपन्न किया है।
इस अवसर पर हिन्दी विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो शिवकुमार मिश्र ने अध्यक्षीय उद्बोधन में बताया कि वो स्वयं महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के पूर्व छात्र रह चुके हैं। किस तरह से उस समय के विद्वान अध्यापकों का सान्निध्य मिला और फिर उसी विश्वविद्यालय में प्रोफेसर और विभागाध्यक्ष बनना गर्व की बात है । साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि आज वो इस विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष की भूमिका में नहीं बैठे हैं, बल्कि पुरातन छात्र के रूप में उपस्थित है। उन्होंने अपनी चुनौतियाँ बताते हुए छात्रों को प्रेरित किया कि वो भी अपनी चुनौतियों के बीच एक सशक्त हस्ताक्षर बनकर उभरे। उन्होंने हिंदी विभाग के शोधार्थियों और पुरातन छात्र को उनके जीवन के संघर्षों के लिए आह्वान किया कि लड़ो और लड़ते रहों।
इस अवसर पर पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. सुरेन्द्र प्रताप ने अपने संस्मरण सुनाए। उनके पिता डॉ. बच्चन सिंह का अनुशासन और महात्मा काशी विद्यापीठ का मिजाज उन्हें, कभी बनारस से दूर होने ही नहीं दिया और इसलिए वो दिल्ली जा – जाकर लौट आएं, क्योंकि उनका कहना था विद्यापीठ और कहीं ना हैं और ना हो सकता है। उन्होंने बताया कि अभी तो उन्होंने हिंदी विभाग के लिए और भी बहुत कुछ करना है।
आज के पुरा छात्र समागम में ही सर्वसम्मति से हिन्दी तथा आधुनिक भारतीय भाषा विभाग, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ पुरा-छात्र सभा का गठन किया गया। इसके अध्यक्ष के रूप में प्रो. अवधेश सिंह को चुना गया। साथ ही प्रो. श्रद्धा सिंह को उपाध्यक्ष, प्रो. शिव प्रसाद मिश्र को महामंत्री, प्रो. सुमन जैन को कोषाध्यक्ष की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई। इस मौके पर देश भर से उपस्थित पुरा-छात्रों-छात्राओं ने अपने अनुभव साझा किए एवं नव-छात्र/छात्राओं को हर संभव अकादमिक मदद का भरोसा दिलाया।

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

यह खबर /लेख मेरे ( निशाकांत शर्मा ) द्वारा प्रकाशित किया गया है इस खबर के सम्बंधित किसी भी वाद - विवाद के लिए में खुद जिम्मेदार होंगा

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