ब्रेथ ईजी में टी.बी मरीजो को मिलेगा नि:शुल्क ओ.पी.डी की सुविधा
डॉ.एस के पाठक श्वांस,एलर्जी एवं टी.बी रोग विशेषज्ञ।

वाराणसी: ब्रेथ ईजी चेस्ट सुपर स्पेशिलिटी हॉस्पिटल अस्सी वाराणसी द्वारा विश्व टी.बी दिवस” 24 मार्च 2023 की पूर्व संध्या को ब्रेथ ईजी कांफ्रेंस हाल अस्सी वाराणसी में आयोजित एक पत्रकार वार्ता में वरिष्ट टी.बी श्वास एवं एलर्जी रोग विशेषज्ञ डॉ. एस के पाठक ने बताया की हम टीबी को समाप्त कर सकते हैं। का उद्देश्य टीबी महामारी से निपटने के लिए आशा को प्रेरित करना और उच्च स्तरीय नेतृत्व निवेश में वृद्धि डब्ल्यूएचओ की नई सिफारिशों को तेजी से अपनाना नवाचारों को अपनाना त्वरित कार्रवाई और बहुक्षेत्रीय सहयोग को प्रोत्साहित करना है।
टी.बी अब लाइलाज बीमारी नही है इसका पूरा इलाज संभव है तथा इस इलाज में 6 से 8 माह का समय लगता है और टी.बी की बिमारी पूर्णत: ठीक हो सकती है।
डॉ. पाठक ने बताया कि टी.बी के लक्षणों में दो हफ्तों से ज्यादा खासी आना शाम के समय प्राय: बुख़ार का आना कफ़ में खून व बलगम का आना लगातार वजन का घटना आदि मुख्यत: होते हैं I डॉ. पाठक ने आगे बताया कि एम्,डी.आर टी.बी, टी.बी का ही एक खतरनाक रूप होता है जिसमे टी.बी के कीटाणु पर टी.बी कि नार्मल फर्स्ट लाइन दवाइयां असर नही करती ऐसे मरीजो के कफ की पूरी जाँच पड़ताल करके कल्चर सेंसिविटी के द्वारा सही दवा सेकेंड लाइन की दवा शुरू की जाती है जिसका कोर्स लगभग 2 वर्ष तक चलता है डॉ पाठक ने ये भी बताया कि टीबी का इलाज छोड़ देने से मरीज को और खतरनाक परिणाम हो सकते है जिसमें बहु औषधि टीबी और बड़े पैमाने पर दवा प्रतिरोधी टीबी के रुप में बीमारी सामने आ सकती है।
डॉ.पाठक ने आगे बताया कि अपने देश में टी.बी. के रोगियों की संख्या काफी अधिक है वर्ष 2019 में विश्व स्वास्थ्य संगठन डबलू एच ओ द्वारा जारी रिपोर्ट बताती है कि दुनिया भर में 1 करोड़ लोग टी.बी. से संक्रमित थे, जिनमें से लगभग 26.90 लाख टी.बी. के मरीज भारत से थे इस प्रकार हम देखते हैं कि पूरे विश्व में टी.बी. मामलों के एक चौथाई केस भारत में हैं I भारत में प्रतिवर्ष लगभग 3.7 लाख लोग टी.बी के कारण मौत के शिकार हो जाते है, प्रतिदिन 1000 से ज्यादा लोगो की इस बीमारी से मृत्यु हो जाती है प्रति 1.5 मिनट में टी.बी के एक मरीज की मृत्यु हो जाती है इस बीमारी के प्रति लापरवाही बरतने से खतरनाक टी.बी का जन्म हो सकता है, जिसे एम् डी आर टी.बी कहते है जिसका इलाज काफी खर्चीला और लगभग २ साल तक चलता है I प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोरोना संक्रमण से पहले 2018 में ही इसकी गंभीरता को समझते हुए 2025 तक देश से टी.बी. उन्मूलन का लक्ष्य बनाया हैI
डॉ. पाठक ने आगे बताया डबलू एच ओ द्वारा इस बार का थीम हैं हाँ हम टीबी को खत्म कर सकते है। अंतर्राष्ट्रीय कार्यक्रम स्टाप टीबी पार्टनरशिप का भी विश्व स्तर पर कार्यक्रम किया जा रहा है इस कार्यक्रम का उद्देश्य टीबी महामारी से निपटने के लिए आशा को प्रेरित करना और उच्च-स्तरीय नेतृत्व निवेश में वृद्धि, डबलू एच ओ की नई सिफारिशों को तेजी से अपनाना त्वरित कार्रवाई और बहुक्षेत्रीय सहयोग को प्रोत्साहित करना है। टी.बी. को 2025 तक समाप्त करने की कोशिशों के तहत राष्ट्रीय टी.बी. उन्मूलन कार्यक्रम ने बेहद महत्वपूर्ण बदलाव किए जिनमें सफलता भी मिली है भारत सरकार स्वास्थ्य मंत्रालय टी.बी. संक्रमित लोगों की मदद करने वाली नीतियों को बनाने की दिशा में लगातार काम कर रहा है इसका एक उदाहरण निक्षय पोषण योजना है I इस योजना के तहत टी.बी. संक्रमित को इलाज के दौरान हर महीने पोषण संबंधी सहायता दी जाती है I