
एटा। शांति नगर स्थित वीरेंद्र वार्ष्णेय के आवास पर काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस आयोजन का उद्देश्य उन्होंने बताया कि हमें अपनी भारतीय संस्कृति के द्योतक धार्मिक पर्वों को हर्षोल्लास के साथ यथासंभव समूह रूप में मनाना चाहिए। सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव ने व्यक्तिगत रूप से व्यक्ति से व्यक्ति के जुड़ाव को कमजोर कर दिया है । इस कारण हमें इन उत्सवों के माध्यम से व्यक्तिगत रूप से सामूहिक मुलाकात को भी महत्व देना चाहिए। इससे संवाद हीनता कमजोर होने के साथ-साथ आत्मीयता बढ़ती है।
काव्य गोष्ठी का शुभारंभ कार्यक्रम के अध्यक्ष प्रमोद वर्मा कार्यक्रम के संयोजक वीरेंद्र वार्ष्णेय एवं डॉ राकेश सक्सेना ने मां वीणा वादिनी के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन करके किया। कार्यक्रम का संचालन अच्युतम केशवम द्वारा किया गया। कार्यक्रम के संयोजक वीरेंद्र वार्ष्णेय द्वारा सभी कवियों एवं विशिष्ट अतिथियों को पटका एवं पगड़ी पहनाकर सम्मानित किया गया।राकेश शम्स द्वारा मां शारदे की वंदना प्रस्तुत की गई।इस अवसर पर कवि संजीव कुमार कुलश्रेष्ठ ने काव्य पाठ करते हुए कहा—-
आप जब से हमें मिल गए हो ,
हमने हंसना शुरू कर दिया है।
पहले मिलते थे ना हम किसी से, सबसे मिलना शुरू कर दिया है।।
डॉ राकेश सक्सेना ने कहा—–
राग रंग फागुनी निराला है,
इसकी मस्ती ने दिल उछाला है।।
होली के त्यौहार का ऐसा चढ़ा खुमार, भाभी हुरियारी दिखें ,देवर भी हुरियार।
महेश मंजुल ने कहा—–
कहां प्यार का संग रहा है होली में, दिखती नहीं मिठास किसी की बोली में,
भाभी आंख तरेर कहे ना ढिंग आना, लग जाएगा दाग कीमती चोली में।।
बलराम सरस ने कहा—
होली के घर होली सूनी भई बिना मजदूरी,
बिना रोटी के फाग बिरानी पकवानों से दूरी,
नगर सेठ के घर दीनू का गिरवी है त्यौहार ,
बरजोरी भाभी देवर की दुविधा में राम जुहार।।
होली का संदेश देश में भाईचारा बना रहे ,
घर आंगन महकाने वाला प्यार हमारा बना रहे।
ना टेसू के फूल दिखे ,ना धरा करे श्रंगार,
ना पहले सी हंसी ठिठोली, ना पहले सा प्यार।।
राजकुमार भरत ने कहा—
अबकी होली खेलेंगे हम बचपन 12 गांव में,
गोंदा की जहां बनी कुटरिया, और निबुआ की छांव में।
पीर दिल की नजर सह गई ,
बात अधरों धरी रह गई ।।
राजेश जैन ने कहा—
अब तलक जैसे हुआ वैसे ही हमने जी लिया,
विष मिला अमृत मिल, जो भी मिला वो पी लिया ,
कह सके ना सुन सके ना , दिल की दिल में रह गई ,
मर गई अभिव्यक्तियां अधरों को हमने सी लिया।।
रंगीला होली का त्योहार ,
मनाता सारा ही संसार।।
राकेश शम्स ने कहा—
बोल कभी ना कड़वे बोलो, मिठास रखो बस बोली में,
कमियों पर तो ध्यान ना दो खुशियां ढूंढो हमजोली में।।
राजेंद्र चौहान ने कहा—
चली सखियों को लेकर साथ गोरी खेले होरी,
लगी सबके मटुकिया हाथ गोरी खेले होरी।।
अच्युतम केशवम ने कहा—
क्या करना धन यश वैभव का, बस इतना ही काफी है,
इन होठों में प्यास और उन होठों में मकरंद रहे।।
किशन चंद्र वार्ष्णेय पप्पी ने कहा—
मैं ना जाऊं रे पनिया भरन ,
एक लड़का मुझे करता है तंग।।
डॉक्टर सुधीर पालीवाल ने कहा–
पहले जैसा होली का त्यौहार कहां है बाबूजी,
रंग बिरंगी खुशियों का संसार कहां है बाबूजी।। इसके अतिरिक्त संजीव सरगम,सोहनलाल, वीरेंद्र वार्ष्णेय, प्रमोद कुमार वर्मा एवं अन्य कवियों ने भी अपनी काव्य की पिचकारी से सभी को हास्य से सराबोर कर दिया। इस अवसर पर सदर विधायक विपिन वर्मा डेविड, पंकज गुप्ता ,डॉक्टर अरुण राजोरिया, प्रदीप भामाशाह, विवेक वशिष्ठ, संजीव गोयल ,विशाल अग्रवाल, जिला प्रचारक विकास जी, राहुल वार्ष्णेय बॉबी ,दीपक श्रीवास्तव, गिर्राज किशोर वार्ष्णेय, वैभव गुप्ता, सुनील गुप्ता, गोविंद मिश्रा ,अर्पित उपाध्याय, प्रज्जवल वार्ष्णेय ,साधना वार्ष्णेय, निशी गुप्ता ,विशाल अग्रवाल, पूनम अग्रवाल आदि श्रोताओं की उपस्थिति रही। कार्यक्रम के समापन पर सभी ने हर्षोल्लास के साथ आपस में गुलाल लगाकर शुभकामनाएं दी।