सरकार की हुई किरकिरी, ढाई साल बाद भी साबित नहीं हुआ गैंगरेप का आरोप 

हाथरस केस: देशभर में मचा था घमासान, सरकार की हुई किरकिरी, ढाई साल बाद भी साबित नहीं हुआ गैंगरेप का आरोप 

हाथरस – 2020 के बहुचर्चित हाथरस गैंगरेप केस मामले में गुरुवार को कोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया। इस केस में तीन आरोपियों को कोर्ट ने बरी कर दिया है जबकि एक पर गैर इरादतन हत्या में दोषी ठहराया गया।
2020 के बहुचर्चित हाथरस गैंगरेप केस मामले में गुरुवार को कोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया। इस केस में तीन आरोपियों को कोर्ट ने बरी कर दिया है जबकि एक पर गैर इरादतन हत्या में दोषी ठहराया गया। उसे उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। इस घटना को करीब ढाई साल बीत चुके हैं। सितंबर 2020 में घटी इस घटना ने काफी सुर्खियां भी बटोरी थीं। लखनऊ से लेकर दिल्ली तक घटना को लेकर घमासान मचा था। इसमें कई अफसर और पुलिसकर्मी भी नपे थे। सरकार की भी अच्छी-खासी किरकिरी हुई थी। हालांकि घटना को ढाई साल बीत जाने के बाद भी कोर्ट में गैंगरेप का आरोप साबित नहीं हो सका है।
दरअसल घटना में बढ़ते विवाद को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने लड़की के शव को चोरी-छिपे रात में ही जलाकर दिया था। शायद लड़की का मेडिकल भी नहीं कराया गया था। इस वजह से कोर्ट में गैंगरेप का आरोप साबित नहीं हो सका है। हालांकि इस कोर्ट के फैसले से पीड़ित पक्ष असंतुष्ट है। पीड़ित की वकील सीमा कुशवाहा ने बताया कि गुरुवार को आए कोर्ट के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील करेंगी। उन्होंने कहा कि तीन आरोपियों को बरी किया है जबकि एक को सजा सुनाई गई है। इस फैसले के खिलाफ वह हाईकोर्ट जाएंगी। बतादें कि हाथरस बिटिया कांड के मुख्य आरोपी को एससीएसटी कोर्ट ने आजीवन कारावास और 50 हजार के अर्थदण्ड की सजा सुनाई है। संदीप हाथरस कांड का मुख्य आरोपी है। संदीप को कोर्ट ने दोषी मानकर धारा 304 और एससीएसटी एक्ट के तहत उम्रकैद की सजा सुनाई है।
गांव के चार लोगों पर लगा था गैंगरेप का आरोप
हाथरस के चंदपा थाने के गांव की 19 साल की युवती के साथ गांव के चार लोगों द्वारा सामूहिक बलात्कार करने का युवती के परिजनों ने आरोप लगाया था। बेटी हाथरस सहित अलीगढ़ के जेएन मेडिकल कालेज में काफी समय तक भर्ती रही थी। 29 सितंबर को उसकी दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में मौत हो गई थी। उस वक्त देशभर में यह घटना सुर्खियों में रही थी। तमाम राष्ट्रीय स्तर के नेता गांव में पहुंचे थे। गांव में पुलिस के साथ ही आरएएफ और पीएसी को तैनात करना पड़ा था।  
2 मार्च की सुबह अदालत के फैसले सम्बंधी तारीख को लेकर प्रकरण के चारों आरोपियों को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच सुबह 11 बजे न्यायालय लाया गया। इसी दौरान वादी पक्ष की अधिवक्ता सीमा कुशवाहा कोर्ट पहुंची। इधर, पुलिस ने सुरक्षा व कानून व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए  बूलगढ़ी गांव में मीडिया, गांव के बाहरी लोगों, राजनीतिक पार्टी के कार्यकर्ता, पदाधिकारी आदि के प्रवेश पर रोक लगा दी है। गांव में भारी सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं। इधर, हाथरस कोर्ट को भी छावनी में तब्दील कर दिया गया है। पुलिस- प्रशासन के अधिकारी सुरक्षा व्यवस्था में लगे हुए हैं।
वादी पक्ष के अधिवक्ता का बयान
वादी पक्ष के अधिवक्ता महिपाल ने बताया कि संदीप को आजीवन कारावास, 50 हजार का जुर्माना की सजा सुनाई गई है। इसमें से 40 हजार रुपये पीड़ित पक्ष को देने का आदेश है। उन्होंने कहा, फैसले के खिलाफ हाइकोर्ट जाएंगे। एक आरोपी को दोषी करार कराने और सजा दिलाने में कामयाब रहे। अन्य के खिलाफ भी इसी फैसले को आधार बनाते हुए अपर कोर्ट जाएंगे।

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

यह खबर /लेख मेरे ( निशाकांत शर्मा ) द्वारा प्रकाशित किया गया है इस खबर के सम्बंधित किसी भी वाद - विवाद के लिए में खुद जिम्मेदार होंगा

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