होली को 50 डेरियां तैयार कर रहीं दूध, घी व पनीर, रिपोर्ट योगेश मुदगल

एटा। होली को लेकर जिले में लगभग 50 डेयरी दुग्ध उत्पाद बनाने का काम कर रही हैं। इसके अलावा 20 से 25 चिलर दूध संकलन का काम कर रहे हैं। होली को देखते हुए दूध और दुग्ध उत्पादों की डिमांड बढ़ेगी। बढ़ी डिमांड को देखते हुए जिले में मिलावटखोर भी सक्रिय हो गए हैं। वह मुनाफाखोरी के लिए जनमानस के स्वास्थ्स से खिलवाड़ करने से पीछे नहीं हट रहे हैं।
जनपद में उत्पादन से ज्यादा है मांग
होली को लेकर जिले में बढ़ी दूध और दुग्ध उत्पादों की डिमांड
आयुक्त खाद्य-2 डा. श्वेता सैनी ने बताया कि खाद्य उत्पाद बेचने के लिए जिले में लगभग 4696 लोगों ने पंजीकरण कराया है
जिले में लगभग 4696 लोगों ने पंजीकरण कराया है। खाद्य उत्पाद तैयार करने के लिए 861 दुकानदारों को लाइसेंस दिये गये हैं
आज से चलेगा अभियान
मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी ने बताया कि होली पर खाद्य पदार्थ लोगों को उपलब्ध हो। उसके लिए खाद्य सुरक्षा विभाग चेकिंग अभियान चलाया जाएगा। अभियान के लिए चार खाद्य सुरक्षा अधिकारियों का दल गठित किया गया है। यह दल जिले के नगरों, कस्बों और ग्रामीण क्षेत्रों में छापामार कार्रवाई करेगा।
जिले के जलेसर में सर्वाधिक डेयरी एवं चिलर संचालित हैं। वहां दूध संकलन का काम होता हैजलेसर क्षेत्र में लगभग 50 डेयरी, 20-25 चिलर संचालित हो रहे हैं। चिलर पर पांच से 10 हजार लीटर दूध संकलित किया जाता है।
-डॉ. श्वेता सैनी, आयुक्त खाद्य-2
सहायक आयुक्त खाद्य-2 डा. श्वेता सैनी ने बताया कि खाद्य उत्पाद बेचने के लिए जिले में लगभग 4696 लोगों ने पंजीकरण कराया है। खाद्य उत्पाद तैयार करने के लिए 861 दुकानदारों को लाइसेंस दिये गये हैं। जिले के जलेसर में सर्वाधिक डेयरी एवं चिलर संचालित हैं। वहां दूध संकलन का काम होता है। उन्होंने बताया कि जलेसर क्षेत्र में लगभग 50 डेयरी, 20-25 चिलर संचालित हो रहे हैं। चिलर पर पांच से 10 हजार लीटर दूध संकलित किया जाता है। डेयरियों पर दूध एवं दूध से बनने वाले उत्पाद तैयार किये जाते हैं। उन्होंने बताया कि होली पर दूध और दुग्ध उत्पादों की डिमांड बढ़ जाती है। दूध का काम करने वाले लोग ही दूध, घी, पनीर, मावा तैयार का बाजार में बेचते हैं। उनमें से ही 50 लोग अधिक मांग को देखते हुए मिलावटखोरी भी करते हैं। ऐसे लोगों के विरुद्ध विभाग अभियान चलाकर कार्रवाई करता है। इसी प्रकार घी बनाने में वनस्पति, नारियल और केमिकल मिलाये जाते हैं। सेंथेटिक दूध में भी केमिकल्स का प्रयोग किया जा रहा है। इसकी जांच विभाग की ओर से की जाती है। दो भैस से लेकर डेयरी संचालक दूध व दुग्ध उत्पाद तैयार कर बाजार में बेच रहे हैं।