अमेरिका के बड़े उद्योगपति जॉर्ज सोर्स के आरोप*
जॉर्ज बनाम अडानी
*समझें राजनैतिक और आर्थिक सोच से कैसे गिराने की सोच पैदा की जा रही है*

जॉर्ज सोर्स अमेरिका के बड़े उद्योगपति है जो लगभग दुनिया के बड़े आर्थिक देशों पर नजर रखते है, जॉर्ज का सबसे बड़ा धंधा है कि वो दुनिया के देशों की सरकारों को गिराते है व अपने माफिक (अमेरिका) बनवाते भी है, अब आप सोच रहे होंगे कि एक आदमी सात समुन्दर दूर बैठा बूढ़ा वृद्ध व्यक्ति कैसे किसी देश की सरकार की गिरा सकता है और बनवा सकता है।
कई बड़े अध्ययनो को गौर से देखें तो पता चलता है कि सोर्स का फाउंडेशन दुनिया के किसी भी देश में संचालित देश विरोधी संस्थाओ को फंड के माध्यम से पैसा मुहिया कराता है व उस संस्था के माध्यम से किसी भी देश में अराजकता का माहौल बनाने के लिये उस देश के बेरोजगार नौजवानों को गलत अर्थ व्यवस्था सरकार के विरोध की बताते है।
*जॉर्ज सोर्स पहली बार मिडिया में आये है*
जॉर्ज सोर्स पहली बार दुनिया में कई सालों के बाद आये है जब कि अमुमन उनका फाउंडेशन ही काम करता रहता है, भारत के खिलाफ आने के कारण और समय भी सही था, इधर देश में गौतम अडानी पर हाय तोबा मची है वही भारत में आम चुनाव भी अगले वर्ष होने है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का और उनके जीवन का भी महत्वपूर्ण चुनाव होने जा रहा है क्योंकि 2024 का आम चुनाव भारत की तकदीर और तस्वीर पर निर्भर करेगा,जॉर्ज सोर्स भलीभांति जानता है कि अगर नरेंद्र मोदी की अगुवाई की सरकार पुनः देश पर काबिज होती है तो भारत के कई बड़े प्रोजेक्ट जो भारत की रेखा को दुनिया में रेखांकित करने वाले है इस चुनाव के बाद भारत विश्व पटल पर ऐतिहासिक रूप से चमकने लगेगा।
जॉर्ज सोर्स जानते है कि मोदी को पीछे धकेलने के सिवा उनके व अमेरिका के पास कोई चारा नहीं है।
*कारण क्या है सामरिक समझ लीजिये*
भारत ने मोदी के नेतृत्व में विदेश नीति पर अपनी स्पष्ट बात रखी है जो विदेश (अमेरिका)को कभी नहीं भाती है.अमेरिका प्रारम्भ से दुनिया पर अपना आधिपत्य जमाये बैठा है,इस शासन का मुख्य कारण डालर रहा है चुंकि डालर जिस-जिस देश के मुँह लगा वह अमेरिका की शरण में हों गया है। अमेरिका ने डालर से व्यापार का विस्तार कई दशकों में जमाया है। जबकि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोविड के बाद दुनिया को अपने साथ खड़ा ही नहीं किया है उनके हर सुख दुःख में खड़े रहे है। इधर रूस और युक्रेन युद्ध के बाद भारत की अहमियत बढ़ी है। और भारत ने अमेरिका (क्वाड टीम) से बाहर निकल कर रूस से तेल लिया और दुनिया चुप भी है।भारत का रुपया हर देश में मान्य होने की तैयारी है।बस यही कुछ बड़े कारण है कि अमेरिका के इस खरबपति जॉर्ज सोर्स को अडानी और मोदी दोनों को एक ही मंच से घसीटने का मौका मिल गया और खुद जॉर्ज मिडिया के सामने आया है। जब कि यह सोचने की बात है कि अमेरिका का खरबपति इंसान अडानी और मोदी पर क्यों अपना वक्त ख़राब करेगा।…. और हम सभी जानते भी है कि भारत को अमेरिका सीरियस नहीं लेता था तो यह आदमी अपना काम धंधा छोड़ कर कीमती समय ख़राब करके मिडिया को भारतीय ज्योतिष की भांति बता रहा है कि मोदी और अडानी का भाग्य एक साथ जुड़ा है।
मिस्टर जॉर्ज सोर्स हम भी भारतीय है हम भी जानते है कि मोदी और अडानी गुजराती है और दोनों का लगभग भाग्य एक साथ ही उदय हुआ है।
*खेर दुनिया में पैसे से व्यापार और भारत के बाजार की मांग व विदेश नीति से अमेरिका बेहद परेशान है।*
अमेरिकी खरब पति जॉर्ज सोर्स को अपने रुख पर अडिग रहना चाहिए क्योंकि भारत उनके वयानों को आम चुनाव तक सुरक्षित रखेगा और लोकसभा चुनाव के परिणामों को भी देखना चाहेगा।
भारतीय लोकतंत्र में ऐसा पहली बार नहीं हुआ है कि भारतीय उद्योगपति या फिर राजनेता पर आरोप नहीं लगे है इससे पूर्व भारतीय राजनीति में विदेशी हाथ हमेशा से रहा है इसका सबसे बड़ा आरोप वोफ़ोर्स मामले में स्वर्गीय प्रधानमंत्री राजीव गाँधी पर भी ऐसा ही आरोप लगा था। जो कि सत्ता से बाहर होने के बाद बेदाग रहे थे।