@,राज्य और केंद्र सरकार—
इतने अधिकारों से वंचित किसी को भी कुंठा होने लगती है——

एटा-आजकल देश और जनहित में सरकारें हर दिशा में सराहनीय कार्य कर रही है जो बधाई योग्य है, लेकिन कहना चाहूंगी कि मीडिया बाले जनता और अधिकारों में सुमार अभी तक क्यों नहीं किये जा रहे हैं, क्या जिला स्तर पर इनके लिए सुविधा जनक प्रेस (कालोनी) नहीं होनी चाहिए क्या इनके और इनके परिवार और बच्चों के लिए( बीमा,) (पेंशन,)सेलरी,) सुरक्षा कानून ) परिवार) और अपनी सुरक्षा हेतु इनको एक हथियार का लाइसेंस बिना परेशानी के नहीं होना चाहिए, अगर इनके कार्य को देखा जाए तो हर कदम इनकी जान को इस बदलते परिवेश में खतरा है अगर कलम का बो सच्चा सिपाही है तो लेकिन ये अधिकार अभी तक किसी भी सरकार ने बहाल नहीं किये ऐसा भी नहीं है कि ये सुविधाएं हर जगह वंचित हैं कुछ प्रांतों और क्षेत्रों में सरकारें इनके लिए कर भी रही है लेकिन ज्यादातर मीडिया अपने अधिकारों के लिए आज तक सरकारों द्वारा जनहित मय सौतेला और लावारिस जैसा व्यवहार सह रही है आप सरकारों से कहना है कि इस पर जल्द विचार किया जाना जरूरी है एसा कोई इंसान नहीं जिसे रोटी कपड़ा और मकान की जरूरत नहीं और ये सुविधाएं वहीं से पैदा होती है जहां वह सारा दिन मेहनत करता है, जब इंसान अपने अधिकारों से वंचित रहता है तो वह दिशा और मंसा हीन हो जाता है इतने अधिकारों से दूर किसी को भी कुंठा होने लगती है क्योंकि कि भूंख हर जगह व्याप्त है।
*दीप्ति चौहान।✍️