
आज पांचवे दिन झांसी से पधारी कथा वाचिका पीतांबरा दीदी ने भरत चरित्र प्रकाश डाला।
श्री काशी सत्संग मंडल के तत्वाधान में ज्ञानवापी परिसर में आयोजित श्रीरामचरितमानस नवाहन पारायण ज्ञान महायज्ञ में पांचवें दिन झांसी से पधारी कथा वाचिका पीतांबरा दीदी ने भरत चरित्र पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारत का मतलब होता है भ माने भक्ति रा माने रती त माने त्याग जो भक्ति रति और त्याग की प्रतिमूर्ति हो उसे भरत कहते हैं भरत अपने भाई श्री राम जी को अनन्य प्रेम करते थे क्योंकि भैया भरत के नाम का भजन स्वयं परमात्मा श्री राम करते थे चौ. भरत सरिस को रामसनेही । जग जब राम राम जप जेहि ।। राम कथा व्यक्ति को जीवन जीना सिखाती है परिवार में कैसे रहा जाता है भाई भाई का प्रेम कैसा होना चाहिए पति पत्नी का प्रेम कैसा होना चाहिए देवरानी जेठानी का प्रेम कैसा होना चाहिए सीखिए कैशल्या और सुमित्रा से कैशल्या को पता चला कि कैकेई ने राम को वनबास दिया तो कैशल्या ने राम से कहा राम चौ. जो पितु मातु कहेऊ वन जाना । तो कानन सत अवध समाना ।। राम चले जाओ वन एक बार भी कैशल्या ने कैकेई से जाकर ये नहीं कहा कि कैकेई मेरे राम का दोष क्या था क्यों भेज रही वनवास पूछा तक नहीं ये है यह है श्रीरामचरितमानस की माताओं का आर्दश ये सिखाती है परिवार से परिवार को जोड़ना श्रीरामचरितमानस रामचरितमानस मानव जीवन का दर्पण है जिसको पढ़ कर आप अपने जीवन को सुचारू रूप से चला सकते हैं कथा में मुख्य रूप से आचार्य सूर्य लाल शास्त्री कार्यकारी अध्यक्ष देवेंद्र कुमार पाठक बनवारी लाल शर्मा राधेश्याम लोहिया सुरेंद्र अग्रवाल चंद्रशेखर सिंह रवि मिश्रा नवीन पाठक लल्लन प्रसाद प्रजापति शक्ति सिंह आदि लोग उपस्थित थे।