हजारों आदिवासियों की निस्वार्थ सेवा कर रहे

गढ़चिरौली (आईएएनएस)| साल 2002 में एक 17 वर्षीय भारती एम बोगामी ने अपनी दुनिया को उस समय ढहते हुए महसूस किया, जब उसके पिता मालू कोपा बोगामी को माओवादियों ने गोलियों से छलनी कर दिया गया था। माओवादियों ने भारती की महत्वपूर्ण एचएससी विज्ञान परीक्षा से एक दिन पहले इस घटना को उसके गांव लहेरी में अंजाम दिया था। कोपा बोगामी कांग्रेस पार्टी के नेता थे। अचानक पारिवारिक त्रासदी से स्तब्ध भारती ने महान मुरलीधर देवीदास आमटे उर्फ बाबा आमटे की सलाह ‘अतीत के अनुभवों से सीखो और भविष्य को देखो’ को याद करते हुए सफल होने के लिए अपनी परीक्षा दी। आज, वह साहसी लड़की बीएएमएस स्नातक है। 39 वर्षीय डॉ. भारती बोगामी की शादी 40 वर्षीय डॉ. सतीश तिरंकर से हुई है। दोनों पति पत्नी अब एक ‘मसीहा’ हैं जो हजारों आदिवासियों की निस्वार्थ सेवा कर रहे हैं।

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

यह खबर /लेख मेरे ( निशाकांत शर्मा ) द्वारा प्रकाशित किया गया है इस खबर के सम्बंधित किसी भी वाद - विवाद के लिए में खुद जिम्मेदार होंगा

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