सरकारी योजना बताकर युवाओं से 30 लाख ठगे

कार्यालय बंदकर भाग गए सभी आरोपी, वॉलंटियर्स टीचर बनाने का दिया था झांसा
सरकारी योजना बताकर युवाओं से 30 लाख ठगे, रिपोर्ट योगेश मुदगल

इन युवाओं ने इतने लोगों को जोड़ा

एटा। पीड़ित प्रदीप के अनुसार उन्होंने 60 लोगों का जोड़ा है वही रूबी ने 50, विनय ने पांच, अवधेश ने 20, सुशील ने 50 लोगों को कंपनी से जोड़ा था। कंपनी के भाग जाने के बाद सभी लोग इन लोगों से रूपये लौटाने का दबाव बना रहे है।

बाकायदा बनाई थी पूरी योजना, चेकिंग भी करते थे

एटा। पीड़ित प्रदीप की मानें तो आरोपियों ने शिक्षक वॉलिटियर्स के ऊपर बीटीओ भी बनाएं थे जो शिक्षकों की जाकर चेकिंग करते थे वह घर-घर जाकर देखने के निर्देश देते थे और खुद भी चेकिंग करने की बात कहते हुए देखने जाते थे।

एटा, । केंद्र सरकार की योजना बताकर सैकड़ों फार्म भरवा लिए। बाद में रूपये लेकर कंपनी रातों-रात रफूचक्कर हो गई। आवेदनकर्ता कंपनी के कार्यालय पहुंचे तो वहां पर ताला जड़ा हुआ मिला। जिस वेबसाइड का नाम लेकर काम चल रहा था वह भी नहीं खुल रही है। सभी लोग एकत्रित होकर थाना कोतवाली देहात पहुंचे और मामले में तहरीर दी है। मामले में चार आरोपियों के विरूद्ध रिपोर्ट दर्ज कराई गई है।

पीड़ित प्रदीप कुमार, कुमारी रूबी, अवधेश कुमार, सुशील कुमार, विनय कुमार आदि ने मिलकर कोतवाली देहात में रिपोर्ट दर्ज कराई है। पीड़ित प्रदीप कुमार ने बताया कि कासगंज रोड पर गोदाम के सामने सीबीके एजूकेशनल एंड वेलफेयर सर्विस के नाम से कार्यालया खोला गया था। ब्रांच हैड मोहम्मद आसिफ निवासी कसैटी कासगंज रोड, महेन्द्र सिह, राजवीर सिंह, मोहम्मद जफर अमीन उल खान निवासी कसेटी मोड़ कोतवाली देहात बताया था। बताया कि सभी लोगों ने मिलकर बताया कि अंर्तराष्ट्रीय संस्था सीबीके एजूकेशनल एंड वेलफेयर सर्विस है जो गृह मंत्रालय के अधीन कार्य करता है। लगभग कार्यालय पांच माह पहले ही खोला गया था। इसमें बताया कि हर घर शिक्षा पहुंचाने के उद्देश्य से हर घर में एक शिक्षक बनाया जाएगा। शिक्षक को हर महीने 900 रूपये, एक बच्चें की पढ़ाई के साथ-साथ वजीफा 1200 रूपये दिए जाएंगे। आरोपियों के झांसे में आकर युवा सर्विस से जुड़ते चले गए। युवाओं को जोड़ने से पहले उनसे चार हजार अनुदान राशि, 950 रूपये आवेदन शुल्क के रूप में मांगे थे। इस तरह से गांव, शहर के युवाओं का जोड़ा गया और युवा आरोपियों के झांसे में आकर जुड़ते भी चले गए। पीड़ित की मानें तो लगभग 1500 से अधिक युवाओं से 20 से 30 लाख रूपये एकत्रित करकें कंपनी भाग गई। पीड़ित का कहना है कि कई लोग सामने ही नहीं आ रहे है। बताया कि दो माह पहले ही वह संस्था से जुड़ा था। 17 जनवरी को पीड़ित कार्यालय पहुंचा। कार्यालय पर ताला जड़ा हुआ मिला। वेबसाइड भी बंद जा रही है।

बंदायू, फर्रूखाबाद में भी खोले हैं ऑफिस

एटा। पीड़ित प्रदीप बताते है कि जिला बंदायू, फर्रूखाबाद में भी इसी तरह के कार्यालय खोले गए थे और वहां भी इसी तरह से लोगों को जोड़ा गया है। उन जिलों में क्या चल रहा है इसकी जानकारी नहीं है।

शुरूआत में कुछ लोगों को मिले थे रूपये

एटा। बताया जा रहा है कि शुरूआत में कुछ लोगों को कंपनी ने रूपये भी दिए थे जिसके बाद युवाओं का कंपनी पर विश्वास बढ़ गया था। कंपनी से अधिक से अधिक से लोग जुड़ते चले गए। आखिर में कंपनी धोखा देकर भाग गई है।

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

यह खबर /लेख मेरे ( निशाकांत शर्मा ) द्वारा प्रकाशित किया गया है इस खबर के सम्बंधित किसी भी वाद - विवाद के लिए में खुद जिम्मेदार होंगा

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