
खोखले विचारों में ही उलझ गए
युवा होने का मतलब है- तर्कशील मन, सोच से खुला, उदार और वैचारिक रूप से संपन्न, लेकिन आज हमारे देश का कैनवास युवाओं की ऐसी तस्वीरें पेश नहीं कर रहा। अब तो ऐसा लगने लगा है कि युवाओं के लिए ये सारी बातें हवा हो गई हैं। कहीं तो कुछ गड़बड़ है हमारी शिक्षा-व्यवस्था में, राजनीतिक सोच या सामाजिक चलन में। कहीं तो कुछ असंतुलन या गड़बड़ी है, जिससे हमारे युवा खोखले विचारों में उलझे और दुविधा में फंसे नजर आते हैं। हकीकत यही है कि उनको इस बात से कोई मतलब नहीं रह गया है कि हमारे देश की आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक हालत कैसी है? या, आम भारतीय आज किन-किन समस्याओं से जूझ रहा है? नौजवान अपना दायित्व समझना नहीं चाहते। युवा पीढ़ी का यह रूप बहुत निराश करने वाला है। बेशक बदलाव के वाहक युवा ही रहे हैं हमेशा, इसलिए उनकी गरिमामय तस्वीर धुंधली होती देखकर मन कसैला हो रहा है। कहने को पूरे देश में हजारों युवा संगठन हैं। मगर इससे वे शायद ही सही राह पर लौट पा रहे हैं। इस पर हमारे देश के कर्णधारों को ध्यान देना चाहिए।
भविष्य के साथ खिलवाड़
दिशाहीन युवा अपने परिवार के लिए तो अभिशाप होते ही हैं, समाज के लिए भी शाप साबित होते हैं। हम अपने आसपास ऐसे कई नौजवानों को देखते हैं, जिनका मन पढ़ाई-लिखाई में नहीं लगता, बल्कि वे बुरे दोस्तों की संगत में दिन भर आवारागर्दी करते रहते हैं। दिक्कत यह भी है कि आज का नौजवान इंटरनेट की दुनिया में इतना रम गया है, वह समाज के सरोकार से कमोबेश कट चुका है। नशा करना, अधैर्य, कामुकता, गाली-गलौज, लड़कियों पर फब्तियां कसना, इंटरनेट का गलत इस्तेमाल आदि कई तरह के अवगुण अनेक नौजवान अपना चुके हैं। वे दिशाहीन होकर अपने माता-पिता का पैसा भी बर्बाद कर रहे हैं। ऐसे दिशाहीन युवा अक्सर अपने मां-पिता या गुरुजनों का सम्मान नहीं करते।