भूख बहुत बुरी चीज है, दुखड़ा रो नहीं सकते

*एमपी* : ……….. भूख बहुत बुरी चीज है, दुखड़ा रो नहीं सकते

अशोकनगर : अप्रैल की तपती दोपहर में परिवार की भूख मिटाने की चिंता सबमें देखी जा रही है। यहां छ:घरा कॉलोनी निवासी दिव्यांग भगवत सिंह को जब यह जानकारी मिली कि पूर्व विधायक के ऑफिस से राशन वितरण हो रहा है तो वह बैसाखी का सहारा लेकर करीब 2 किमी चला और ऑफिस के बाहर सोशल डिस्टेंस बनाने के लिए बनाए गोल घेरे में खड़ा हो गया।

दिव्यांग यह सोचकर लाइन से अलग नहीं हटा कि लोग ऐसा न सोचे कि दिव्यांगता का फायदा उठा रहे हैं। जब धूप तेज हुई और खड़ा रहना असहनीय हुआ तो दिव्यांग ने अपना कृत्रिम पैर निकालकर गोल घेरे में रख दिया और बैसाखी के सहारे छांव में जाकर बैठ गया। हालांकि जब लाइन में लगे दिव्यांग के पैर पर पूर्व विधायक जज पाल सिंह की नजर पड़ी तो उन्होंने भोजन तो दिया ही, इसके बाद तांगा मंगाकर घर भी छुड़वाया और शाम को भोजन पैकेट के साथ राशन दिव्यांग के घर पहुंचाया।

दिव्यांग भगवत सिंह ने एक हिन्दी दैनिक को बताया कि 5 साल पहले ट्रेन हादसे में उनका पैर कट गया था, तब से वे असहाय हो गए हैं। भगवत ने बताया कि हम अपना दुखड़ा तो रो नहीं सकते, लेकिन भूख बहुत बुरी चीज है। परिवार में 6 सदस्य हैं। मैं, मेरी पत्नी, बहू-बेटा और 2 पोती (6 साल और डेढ़ साल)। बेटा गोलू खाने की होटल पर काम करता है, पर यह सब अभी लॉकडाउन में बंद चल रहे हैं। पेट भरने मैं बैसाखी के सहारे खाना मांगने इधर-उधर जाता हूं। पूर्व विधायक के कार्यालय पर खाना लेने सब गोल घेरे में खड़े थे, मैं भी जाकर खड़ा हो गया था।

पूर्व विधायक का कहना है कि अब भगवत को खाने के लिए कार्यालय तक आने की जरूरत नहीं है, बल्कि उसके घर पर ही खाना पहुंचाया जाएगा। दोनों टाइम का खाना और कच्चा राशन भी उसके घर पहुंचाएंगे। उस तक खाना पहुंचाने की जिम्मेदारी सौंप दी है।

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