प्रणाम जो जन्मना ही आदि गुरू है

सभी मित्रों को गुरु पूर्णिमा के पावन पर्व की बहुत बहुत बधाई ।
कृष्णम् वन्दे जगदगुरुम् ।
जो समस्त प्राणियों को अभ्युदय और निश्रेयष्कर हितकर ज्ञान स्मृति
और चेतना का प्रकाश अपनी अहैतुकी कृपा के पावन प्रसाद
स्वरूप देते हैं , उन परम आराध्य आदिगुरू श्री कृष्ण जी को
कोटि कोटि प्रणाम ।
अपने पूज्य मातृपितृ भातृ के श्री चरणों में भी पुनि पुनि
प्रणाम जो जन्मना ही आदि गुरू है ।
कक्षा एक से परास्नातक तक विद्यादान देकर सुजनसुसंगयोग्य बनाने वाले समस्त आचार्य प्राचार्य गुरुजनों की पुनि पुनि चरणवन्दना ।
आचार्य श्री श्रीराम शर्मा जी को शतशतप्रणाम ।
जिन जिन ज्ञानवृध्द, तपोवृध्द, अनुभववृध्द विभूतियों
ने किसी भी रूप में किसी भी क्षेत्र में मेरा मार्ग सुगम बनाने हेतु मार्गदर्शन किया है, तथा जो लोकशिक्षण के पुनीत उत्तरदायित्व का निष्ठापूर्वक निर्वहन कर रहे हैं , उन सभी को शत शत प्रणाम ।
आचार्य कविकिंकर

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

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