
लेक सफारी का रूप लेगी दरियावगंज झील, बढ़ेगा ईको टूरिज्म
कासगंज, । प्राकृतिक संपन्नता की दृष्टि से जनपद कासगंज एक विशेष महत्त्व रखता है। यहां स्थित तमाम छोटे जल स्रोतों के अलावा चार प्रमुख जल स्रोत ऐसे हैं, जो प्राकृतिक आपदाओं के दौरान भी अपने अस्तित्व में बने रहे। इनमें सबसे बड़ा नाम दरियावगंज झील का है। इसकी अब गौखुर आद्रभूमि संरक्षण क्षेत्र के नाम से भी जाना जाता है। प्रशासन दरियावगंज झील को लेक सफारी के रूप में विकसित करने जा रहा है। विशेषज्ञों की राय के मुताबिक इसका खाका खींचना शुरू कर दिया गया।
कासगंज की तहसील पटियाली में स्थित दरियावगंज झील जनपद का एक प्रमुख जल स्रोत है। यह झील 100 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल में फैली है।
ईको टूरिज्म के लिहाज से दरियावगंज झील एक उपर्युक्त स्थान है। प्रदेश सरकार के निर्देश पर यहां पर्यटन की कई तरह की संभावनाओं को खोजा जा रहा है। ईको टूरिज्म बढ़ाने के लिए दरियावगंज झील को लेक सफारी के रूप में विकसित किया जा सकेगा। इस पर जिला प्रशासन ने विशेषज्ञों का सहयोग ले रहा है
प्रकृति प्रेमी पर्यटकों को आकर्षित करने व ईको टूरिज्म बढ़ाने के उद्देश्य से झील को लेक सफारी के रूप में विकसित जा सकता है। विशेषज्ञों के जरिए इसकी संभावना तलाशी जा रही हैं, जिससे पर्यटक यहां ज्यादा से ज्यादा आएं।
हर्षिता माथुर, डीएम
हो सकते हैं ये काम
प्रकृति प्रेमी पर्यटकों को आकर्षित करने व ईको टूरिज्म बढ़ाने के उद्देश्य से झील को लेक सफारी के रूप में विकसित करने के लिए सभी जरूरी व्यवस्थाएं जुटाने की कार्ययोजना है। इस में वाटर स्पोर्ट्स एडवेंचर, हॉर्स राइडिंग, कैम्पिंग नाइट, बर्ड वाचिंग, देशी फूड कोर्ट जैसी तमाम रोमांचकारी व अन्य जनसुविधाओं की संभावनाओं को खोजा जा रहा है। देशी विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करने वाली इस योजना से स्थानीय निवासियों को सम्मानजनक रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे।